Nabinnagar vidhanshabhah seat: बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक है, और अगर बात करें औरंगाबाद जिले की तो नबीननगर की राजनीति पिछले एक दशक से सियासी बदलाव की गवाह रही है. आज राजद की मौजूदा पकड़ और जदयू की पुरानी पकड़ के बीच 2025 में एक और दिलचस्प मुकाबला देखनेको मिल सकता है. जहां 2010 और 2015 में जनता दल (यूनाइटेड) का कब्जा रहा, वहीं 2020 में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने एक बड़ी जीत के साथ वापसी की.
सामाजिक जनसंख्या
2020 में यहां की कुल पंजीकृत मतदाता लगभग 2,75,914 थे. मतदाता प्रतिशत लगभग 57.8 प्रतिशत दर्ज हुए थे. वहीं ग्रामीण आबादी अधिक थी (लगभग 94%) और शहरी भाग लगभग 6% था. अनुसूचित जाति (SC) के हिस्सेदारी करीब 24–25% है अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) अल्पसंख्यक वॉटर आदि भी चुनावी समीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. सामाजिक जातीय समीकरण यहां की राजनीति में निर्णायक जगह रखनी है.
पिछले 2 विधानसभा चुनाव के नतीजे
2020 में राजद के विजय कुमार सिंह ने जदयू के वीरेंद्र कुमार सिंह को 20,121 वोटो से हराया था. वही 2015 में जदयू के वीरेंद्र कुमार सिंह ने बीजेपी के गोपाल नारायण सिंह को 5,2261 वोटो की बढ़त से हराया था. इस तरह 2015 में जदयू की पकड़ मजबूत रही और वहीं 2020 में राजद ने दबदबा बना लिया. विजय कुमार सिंह ने 2020 में डीजीपी से आरजेडी का दामन थामा था और परिणाम स्वरुप भारी सफलता मिली थी. वहीं 2015 में कई प्रत्याशी मल्टी प्रत्याशियों के बीच बंटते वोटो में से मैच हुआ, 2020 में लगभग दो मुख्य दलों RJD VS JDU के बीच मुकाबला हुआ घरेलू मुद्दे विकास व बिजली घर प्रोजेक्ट जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास से जुड़े वादे वहां के स्थानीय लोगों के समीकरणों का नतीजा बनी.
2025 के लिए क्या हैं चुनौतियां
आने वाले विधानसभा चुनाव में भले राजद की पकड़ 2020 से मजबूत है, और उन्होंने अच्छी जीत हासिल की थी. लेकिन, वोट शेयर में और प्रदर्शित के साथ मुकाबला करना होगा कि वह इस जीत को दोहरा सके. वहीं जेडीयू और एनडीए का मुंह मांगा वापसी दवा है, कि सही गठबंधन से वे राजद की जीत को चुनौती दे सकते हैं. खासकर मतदाता विकास, रोजगार, बिजली, सड़क आदि मुद्दों पर स्थानीय लोगों को संतुष्ट कर सकते हैं जैसे कि पिछले चुनाव में देखा गया कि मतदान प्रतिशत 50 से 60% के बीच रहा अगर अधिक जो जगह र मतदान हो तो परिणाम बदल सकते हैं.
नबीननगर की राजनीति पिछले एक दशक में बदलाव से भरी नजर आ रही है. जेडीयू की मजबूत पकड़ थी लेकिन राजद 2020 में बड़ी अच्छी जीत हासिल कर चुनाव के नतीजे ही बदल दिए. 2025 में यह सीट एक “बैलेंस ब्रीकर” साबित हो सकती है. यदि राजद अपनी जमीनी कामों और वादों को जनता तक पहुंचाएं और जेडीयू एनडीए गठबंधन एक प्रभावी रणनीति के साथ उतरे, अब देखना दिलचस्प होगा कि 2025 में इस सीट पर उलट फेर होता है या फिर राजद अपनी जीत जारी रखती है.