Bihar election: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मी अब चरम पर है. अब जब बिहार में होने वाले इस राजनीनिक मैच के तारिख की धोषणा होने ही वाली है पहला सवाल है कि राजनीति के इस पिच पर महागठबंधन यानी INDIA गठबंधन और सत्ता पक्ष के NDA गठबंधन के बीच सीट बंटवारे का गणित आखिरकार किस रूप में सामने आएगा. रविवार देर रात तक चली दोनों खेमों की बैठकों के बाद अब तस्वीर लगभग साफ होती दिख रही है. दोनों ही गठबंधन के नेताओं का कहना है कि सीट शेयरिंग को लेकर सहमति बन चुकी है और अगले कुछ दिनों में इसका औपचारिक ऐलान हो जाएगा.
जो जानकारी सामने आ रही है उसके हिसाब से इंडिया गठबंधन में वन-टू-वन बातचीत से सहमति बनी है. इससे पहले रविवार को पटना में राजद नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के सरकारी आवास पर INDIA गठबंधन के शीर्ष नेताओं की मैराथन बैठक हुई. जहां पहले सामूहिक चर्चा हुई और फिर बाद में राजद ने कांग्रेस और वीआईपी नेताओं से अलग-अलग वन-टू-वन बातचीत की. देर रात तक चली इस कवायद के बाद अब सोमवार को वामदलों माले, सीपीआई और सीपीएम के साथ भी बातचीत का दौर तय किया गया है.
तेजस्वी यादव की अगुवाई में गठबंधन के भीतर जो समन्वय दिखाई दे रहा है, वह बताता है कि विपक्ष ने इस बार सीटों के बंटवारे को लेकर शुरुआती चरण में ही स्पष्टता बनाने की कोशिश की है. यही वजह है कि गठबंधन ने 7 अक्टूबर को जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाने का निर्णय लिया है, जिसमें सीटों की औपचारिक घोषणा होगी. अंदरखाने जो चर्चा हुई है और जो जानकारी सामने आई है उसके मुताबिक, इंडिया गठबंधन में राजद (RJD) 130 सीटें, कांग्रेस 55 सीटें, वाम दल (माले, CPI, CPM) 35 सीटें , वीआईपी (विकासशील इंसान पार्टी) 20 सीटें एंव झामुमो और रालोजपा को राजद कोटे से 5 सीटें मिल सकती हैं तो वहीं कांग्रेस कोटे से पान समाज के नेता आईपी गुप्ता को टिकट दिए जाने की चर्चा है. स्पष्ट है कि गठबंधन के भीतर बड़े दलों ने छोटे दलों को भी जगह दी है. यह INDIA गठबंधन की मजबूती के लिए अहम संकेत माना जा सकता है.
दूसरी ओर सत्ता पक्ष यानी NDA में भी सीट शेयरिंग पर बातचीत लगभग पूरी हो चुकी है. भाजपा और जदयू के बीच इस बार भी तालमेल का फार्मूला पिछले चुनाव की तरह ही रहने के आसार हैं. गठबंधन के भीतर सहमति के मुताबिक BJP और JDU के बीच 203 सीटें बंटेंगी जबकि शेष 40 सीटें छोटे सहयोगियों के लिए छोड़ी जाएंगी. इन 40 सीटों में 22-25 सीटें चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को दी जा सकती हैं. 7-8 सीटें जीतन राम मांझी की हिंदुस्तान अवाम मोर्चा के खाते में जाएंगी. तो लगभग 7-8 सीटें उपेंद्र कुशवाहा को मिल सकती हैं. NDA की इस रणनीति से साफ है कि भाजपा और जदयू ने छोटे सहयोगियों को भी उचित प्रतिनिधित्व देने का फैसला किया है, ताकि चुनावी मैदान में किसी तरह की नाराजगी न रहे.
सीट शेयरिंग को लेकर दोनों खेमों की बैठकों से जो संकेत निकले हैं, वे इस बार सीधी लड़ाई की ओर इशारा कर रहा है. INDIA गठबंधन ने अपनी रणनीति साफ कर दी है कि वह NDA के खिलाफ संयुक्त मोर्चा बनाएगा और सीटों के बंटवारे को लेकर मतभेदों को चुनाव से पहले ही खत्म करने की कोशिश की जाएगी. तो इसी तरह NDA भी इस बार सहयोगियों के बीच सामंजस्य बिठाने में जुटा है, ताकि टिकट बंटवारे पर असहमति न उभरे. दोनों ही गठबंधन जानते हैं कि बिहार में जातीय समीकरणों के साथ-साथ उम्मीदवारों का स्थानीय प्रभाव भी निर्णायक होता है. ऐसे में सीट बंटवारे में छोटी-सी चूक भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है. चुनावी पटल पर सीट शेयरिंग का फॉर्मूला अक्सर आगामी राजनीतिक समीकरणों का संकेत देता है. इस बार बिहार की राजनीति में यह स्पष्ट है कि INDIA और NDA दोनों ही गठबंधन ने चुनाव से पहले अपने पत्ते खोलने का फैसला किया है.
7 अक्टूबर को INDIA गठबंधन की घोषणा और NDA की जल्द आने वाली आधिकारिक सूची चुनावी जंग की दिशा तय करेगी. सीटों की संख्या से परे, असली चुनौती इन गठबंधनों के सामने आपसी तालमेल और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बनाए रखने की होगी. आने वाले कुछ दिन बिहार की राजनीति के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं. क्योंकि सीट बंटवारे का गणित ही आगे चलकर सत्ता के समीकरण तय करेगा.