Alinagar Vidhan Sabha : दरभंगा जिले का अलीनगर विधानसभा क्षेत्र बिहार की राजनीति में हमेशा से दिलचस्प मुकाबले का गवाह रहा है. मिथिलांचल में जो कि गढ़ तो भाजपा का माना जाता है लेकिन यह वही सीट है जहां दबदबा राजद का रहा है. ऐसा हम नहीं यहा के परिणाम कहते हैं. भौगोलिक रूप से ग्रामीण इलाका होने के बावजूद यह सीट प्रदेश की राजनीतिक दिशा तय करने में अक्सर अहम भूमिका निभाती रही है. 2008 में परिसीमन आयोग की सिफारिश पर अस्तित्व में आई इस सीट पर 2010 में पहली बार चुनाव हुए थे. तब से अब तक यहां तीन बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं और यह नतीजों के रूप में यह दो बार राजद एक वीआईपी की झोली में गया.
अलीनगर, तारडीह, घनश्यामपुर प्रखंड और मोतीपुर पंचायत को कुछ हिस्सों को समेटे यह इलाका दरभंगा लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है. दरभंगा जिला मुख्यालय से करीब 38 किलोमीटर और पटना से 145 किलोमीटर दूर स्थित अलीनगर सड़क मार्ग से मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, मधुबनी और सीतामढ़ी जैसे क्षेत्रीय केंद्रों से जुड़ा जरूर है, लेकिन आज़ादी के इतने साल बाद भी रेल संपर्क की कमी यहां की सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है. बाकी समस्याएं तो है ही.
ग्रामीण इलाका होने के चलते अलीनगर की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है. धान, गेहूं और मक्का यहां की प्रमुख फसलें हैं. लेकिन हर साल बाढ़ और जर्जर सड़क नेटवर्क लोगों की जिंदगी और विकास दोनों में बाधा डालते हैं. , स्वास्थ्य सुविधाओं और रोजगार के अवसरों की कमी प्रमुख चुनावी मुद्दें जरूर है लेकिन इस इलाके में आईटीआई और डिग्री कॉलेज का होना यहां के छात्रों और युवाओं को बहुत खलता है. अब देखा जाए तो 2020 के चुनाव में मिश्री लाल यादव ने डिग्री कॉलेज और आईटीआई की स्थापना का वादा कर चुनाव जीता, लेकिन यह वादा अब तक पूरा नहीं हो पाया जिसको लेकर जनता में काफी आक्रोश है. विकास योजना से कुछ काम जरूर हुए है लेकिन कई बुनियादी प्रोजेक्ट अब भी अधूरे हैं.
चुनावी इतिहास की बात करें तो 2010 और 2015 के विधानसभा चुनावों में यहां से राजद के दिग्गज नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी ने जीत दर्ज की तो वहीं 2020 में इस सिलसिले को तोड़ते हुए विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के उम्मीदवार मिश्री लाल यादव ने राजद के विनोद मिश्रा को 3,101 वोटों से हराया. 2020 के चुनाव में मिश्री लाल यादव को 61,082 वोट (38.62%) और विनोद मिश्रा को 57,981 वोट (36.66%) मिले. बाद में 2022 में VIP के एनडीए से अलग हो कर मिश्री लाल यादव भाजपा में शामिल हो गए. इतना ही नहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के गोपाल जी ठाकुर ने दरभंगा सीट पर जीत हासिल की थी. ठाकुर को उस चुनाव में अलीनगर विधानसभा क्षेत्र में राजद पर 9,842 वोटों की बढ़त मिली थी.
मुख्य रूप से ब्राह्मण, यादव और मुस्लिम मतदाताओं के त्रिकोणीय समीकरण पर टिके इस सीट पर दो खेमों के बीच सीधी लड़ाई देखने को मिलती है लेकिन नतीजे कोई तीसरा तय करता है. मतलब की इन तीन के अलावा बाकी दूसरे भी चुनावी नतीजों को प्रभावित करते है. जैसे इस सीट पर अनुसूचित जाति के मतदाताओं की हिस्सेदारी लगभग 12% हैं. जो हार और जीत के अंतर को कम या ज्यादा करने में काफी अहम भूमिका निभाते है.
अलीनगर की राजनीति की सबसे बड़ी विशेषता इसका करीबी मुकाबला रहा है. विधानसभा में यह सीट अक्सर राजद के पक्ष में जाती रही है, जबकि लोकसभा में भाजपा यहां बढ़त हासिल करती है. यह विरोधाभास चुनाव को और भी दिलचस्प बनाता है. चुनावी मैदान में जहां स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा टिकट बंटवारे को काफी प्रभावित करते तो वहीं टिकट ना मिलने की नाजरगी स्थानीय उम्मीदवार को बागी भी बना देती है. बीते चुनाव का इतिहास इस बार भी खुद को दोहरा रहा है. इस बार के चुनाव में NDA की स्थिति तो और जटिल हो गई है क्योंकि एक तरफ जहां मौजूदा विधायक मिश्री लाल यादव पर बगावत के आरोप लग रहे हैं तो दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर काफी विरोध हो रहा है.
स्थानीय स्तर पर पप्पू सिंह और मनोज कुमार झा भाजपा के उम्मीदवार के तौर पर दावेदारी पेश कर रहें है लेकिन चर्चाएं हैं कि लोकप्रिय लोक गायिका मैथिली ठाकुर भाजपा के टिकट पर अलीनगर से उतर सकती हैं. वहीं दुसरी तरफ जदयू नेता नीतीश प्रभाकर भी चुनाव में अपनी किस्मत आजमाने की सोच रहे हैं. अगर यह सीट जदयू खेमे में जाती है तो नीतीश यहां से NDA के उम्मीदवार हो सकते हैं. हालांकि विपक्षी खेमें से राजद नेता विनोद मिश्रा एक बार फिर से किस्मत आजमाने की कोशिश में है लेकिन उनकी दावेदारी पर अंतिम मुहर पार्टी लगाएगी. बिनोद मिश्रा राजद के सबसे बड़े दावेदार है. वहीं यहां तीसरा खेमा यानी की जन सुराज भी मैदान है और सोहन झा, विप्लव चौधरी तीसरे खेमे के रूप में खुद को दावेदार बता रहें है. कुल मिलाकर देखा जाए तो इस बार अलीनगर का चुनाव इस बार बड़ा दिलचस्प होने वाला है.