Asthawan vidhanshabha seat: नालंदा जिले की अस्थावां विधानसभा सीट बिहार की उन गिनी-चुनी सीटों में से एक है. जहां 2001 के बाद से किसी पार्टी ने हार का मुंह नहीं देखा. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले में स्थित यह सीट जेडीयू का अभेद्य किला बन चुकी है, लेकिन इस बार 6 और 11 नवंबर को होने वाले दो चरणों के मतदान में राजद-कांग्रेस गठबंधन इस गढ़ को ढहाने की रणनीति बना रहा है.
अगर पिछले दो चुनाव की बात करें तो जेडीयू के जितेंद्र कुमार ने 2020 में शानदार प्रदर्शन करते हुए 51,125 वोट हासिल किया, और राजद के अनिल कुमार को 11,600 वोट के अंदर से पराजित किया. वहीं 2015 विधानसभा चुनाव के नतीजे महागठबंधन की लहर के बीच भी जितेंद्र कुमार ने अपनी सीट बचाए रखी और लोजपा के छोटे लाल यादव को 10,044 वोटो से हराया, इस चुनाव में मतदान प्रतिशत 49. 24% था, जो लगातार कम मतदान की चिंताजनक प्रवृत्ति दर्शाता है.
बिहार शरीफ के महज 11 किलोमीटर दूर स्थित अस्थावां पूरी तरह ग्रामीण क्षेत्र है. यहां की 25.19% अनुसूचित जाति और 5.1% मुस्लिम आबादी चुनावी समीकरण तय करने में भूमिका निभाती आ रही है. 2024 के लोकसभा चुनाव में यहां 3,03,479 पंजीकृत मतदाता थे.
50% से कम मतदान प्रतिशत विपक्ष के लिए एक बड़ा अवसर है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है, कि यदि मतदाताओं में उत्साह जगाया जाए और मतदान प्रतिशत बढ़ाया जाए तो जेडीयू की चुनौती आसान नहीं होगी.
14 नवंबर को होने वाली मतगणना यह तय करेगी कि क्या जितेंद्र कुमार लगातार छठी बार जीत दर्ज करेंगे या फिर विपक्ष नीतीश के इस गढ़ में सेंध लगाने में सफल होंगे.