Bihar elections : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले सीमांचल क्षेत्र राजनीतिक दलों का अखाड़ा बन गया है. मुस्लिम बाहुल्य इस इलाके में पूर्णिया के साथ किशनगंज, अररिया और कटिहार जिले शामिल हैं. नेपाल की सीमा से सटे और बांग्लादेश बॉर्डर के करीब होने के कारण यह क्षेत्र हमेशा चर्चा में रहता है. यहां बाढ़, कटाव, पलायन और विकास जैसे मुद्दे प्रमुख हैं. भाजपा जहां घुसपैठ के मुद्दे को उठाकर अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिश कर रही है, वहीं महागठबंधन अपने परंपरागत वोटबैंक को साधने में जुटा है. इसी बीच असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM भी यहां अपनी जमीन तलाश रही है.
कोसी और सीमांचल पर पार्टी की नजर
पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्णिया में जनसभा कर 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का शिलान्यास किया था. उन्होंने लंबे समय से प्रतीक्षित पूर्णिया एयरपोर्ट की भी शुरुआत की. इस दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत एनडीए के कई बड़े नेता मंच पर मौजूद रहे. इसके बाद 21 सितंबर को लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान पूर्णिया के रंगभूमि मैदान में नव संकल्प महासभा करने वाले हैं. पार्टी का फोकस इस कार्यक्रम के जरिए कोसी और सीमांचल क्षेत्र पर होगा.
कांग्रेस भी बना रही सीमांचल साधने की रणनीति
इधर, कांग्रेस भी सीमांचल को साधने की रणनीति बना रही है. 26 सितंबर को कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा की पूर्णिया में रैली प्रस्तावित है. हालांकि, इस पर अंतिम फैसला होना बाकी है. इससे पहले राहुल गांधी ने वोटर अधिकार यात्रा के दौरान सीमांचल का दौरा किया था. उस वक्त उनके साथ तेजस्वी यादव भी मौजूद थे. पूर्णिया सांसद पप्पू यादव, जो गांधी परिवार के करीबी माने जाते हैं, उनके क्षेत्र में प्रियंका की रैली से महागठबंधन को मजबूती देने की कोशिश की जाएगी. लगातार रैलियों और नेताओं की आमद से यह साफ है कि सीमांचल का पूर्णिया विधानसभा चुनाव से पहले सियासत का केंद्र बनता जा रहा है. भाजपा, महागठबंधन और लोजपा (रामविलास) सभी इस इलाके को साधने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते.