न तो MLA और ना ही MLC फिर भी मुख्यमंत्री..किस नियम के कारण बिहार सरकार के मुखिया बने हुए हैं नीतीश कुमार

Nitish kumar : बिहार की राजनीति में सोमवार को बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है. मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने बिहार विधान परिषद (एमएलसी) की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. यह इस्तीफा उनके प्रतिनिधि के रूप में जेडीयू एमएलसी Sanjay Gandhi द्वारा विधान परिषद के सभापति को सौंपा गया. मीडिया सूत्रों के अनुसार जेडीयू के कई वरिष्ठ नेता पहले मुख्यमंत्री आवास पहुंचे, जिसके बाद इस्तीफे की प्रक्रिया शुरू हुई. Sanjay Gandhi खुद इस्तीफा पत्र लेकर बिहार विधान परिषद पहुंचे और औपचारिक रूप से इसे जमा किया गया. इस्तीफा पत्र में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से सदन की सदस्यता छोड़ने की बात लिखी है. गौरतलब है कि Nitish Kumar हाल ही में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे और नियमों के अनुसार उन्हें 14 दिनों के भीतर किसी एक सदन की सदस्यता छोड़नी थी.

मुख्यमंत्री पद से भी इस्तीफे की अटकलें तेज

राजनीतिक गलियारों में अब इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि Nitish Kumar जल्द ही मुख्यमंत्री पद से भी इस्तीफा दे सकते हैं. ऐसी अटकलें हैं कि वे केंद्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए राज्यसभा जा सकते हैं. यदि मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा होता है, तो बिहार में नए मुख्यमंत्री को लेकर कयासों का दौर शुरू हो गया है. संभावित नामों में Samrat Choudhary, Sanjeev Chaurasia और Prem Kumar शामिल बताए जा रहे हैं. हालांकि, इस पर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.

क्या बिना सदस्य बने रह सकते हैं मुख्यमंत्री?

संविधान के अनुसार कोई व्यक्ति बिना विधायक या विधान परिषद सदस्य बने अधिकतम 6 महीने तक मंत्री या मुख्यमंत्री पद पर रह सकता है. इस आधार पर नीतीश कुमार अगले छह महीनों तक मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं, लेकिन राजनीतिक परिस्थितियां कुछ और संकेत दे रही हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार अप्रैल महीने में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं. बताया जा रहा है कि उनकी राज्यसभा सदस्यता 10 अप्रैल से प्रभावी हो जाएगी. ऐसे में 10 अप्रैल से पहले या उसके कुछ दिनों बाद, लगभग 15 अप्रैल तक, बिहार में नई सरकार बनने की संभावना जताई जा रही है.

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