Nitish kumar : बिहार की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. इसके साथ ही वे अब राज्य विधानमंडल के किसी भी सदन के सदस्य नहीं रहे हैं. हालांकि इस्तीफे के बावजूद वे फिलहाल मुख्यमंत्री पद पर बने हुए हैं, जिससे राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि वे इस पद पर कब तक बने रहेंगे और अगला कदम क्या होगा.
क्यों दिया इस्तीफा?
संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार कोई भी व्यक्ति एक साथ दो सदनों का सदस्य नहीं रह सकता. नीतीश कुमार हाल ही में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं, जिसके बाद उन्हें 14 दिनों के भीतर एक सदन की सदस्यता छोड़नी अनिवार्य थी. इसी नियम के तहत उन्होंने विधान परिषद की सीट से इस्तीफा दिया.
क्या बिना सदस्य बने रह सकते हैं मुख्यमंत्री?
संविधान के अनुसार कोई व्यक्ति बिना विधायक या विधान परिषद सदस्य बने अधिकतम 6 महीने तक मंत्री या मुख्यमंत्री पद पर रह सकता है. इस आधार पर नीतीश कुमार अगले छह महीनों तक मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं, लेकिन राजनीतिक परिस्थितियां कुछ और संकेत दे रही हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार अप्रैल महीने में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं. बताया जा रहा है कि उनकी राज्यसभा सदस्यता 10 अप्रैल से प्रभावी हो जाएगी. ऐसे में 10 अप्रैल से पहले या उसके कुछ दिनों बाद, लगभग 15 अप्रैल तक, बिहार में नई सरकार बनने की संभावना जताई जा रही है.
शपथ को लेकर क्या नियम है?
राज्यसभा सदस्य बनने के बाद शपथ लेना अनिवार्य है, लेकिन इसके लिए कोई सख्त तारीख तय नहीं होती. नीतीश कुमार अपनी सुविधा के अनुसार शपथ ले सकते हैं. यदि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देते हैं, तो नई सरकार के गठन तक वे कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में बने रहेंगे. यह एक सामान्य संवैधानिक प्रक्रिया है, जो हर राज्य में लागू होती है. हालांकि राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि बिहार में जल्द ही नई सरकार का गठन हो सकता है. हालांकि अंतिम निर्णय पूरी तरह नीतीश कुमार और उनके राजनीतिक कदमों पर निर्भर करेगा.