Bihar assembly election: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारी के बीच एनडीए गठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है चिराग पासवान के बाद अब उपेंद्र कुशवाहा और जितना मर्जी ने भी अपनी मांगों को लेकर सख्त अपना लिया है जिससे भाजपा की मुश्किलें बढ़ गई है.
शनिवार को भाजपा केंद्रीय चुनाव समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी. जिसमें पार्टी के शीर्ष नेताओं ने उम्मीदवारों के नाम पर चर्चा की, सूत्रों के मुताबिक बीजेपी जल्दी कैंडीडेट्स की पहली लिस्ट जारी कर सकती है, लेकिन सहयोगी दलों के साथ सीट शेयरिंग का फार्मूला अभी तक फाइनल नहीं हो पाया है. वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने शनिवार को भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से डेढ़ घंटे तक मुलाकात की शुरुआत में 10 सीटों की मांग करने वाले, कुशवाहा ने अपनी मांग बढ़ाकर 15 सीट कर दी है. यह बदलाव चिराग पासवान को मिलने वाली सीटों को देखते हुए किया गया है. हालांकि बीजेपी की तरफ से अभी तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है. लेकिन कुशवाहा ने साफ किया है कि एनडीए में बातचीत अभी जा रही है, और सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर विश्वास नहीं करना चाहिए.
वहीं दूसरी और हिंदुस्तान आवाम मोर्चा के नेता और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने भी अपनी पार्टी के लिए कम से कम 15 सीटों की मांग की है. मांझी ने चेतावनी दी कि अगर उनकी पार्टी को सम्मानजनक संख्याओं में सीट नहीं मिली तो हम के लिए अपमानजनक होगा. रश्मिरथी की पंक्तियों की पैरोडी को करते हुए मांझी ने X पर लिखा “यदि न्याय हो तो आधा दो यदि, कोई बाधा हो तो केवल 15 गवा दो….अपनी पूरी जमीनी रखो, हम खुशी से जो मिलेगा खा लेंगे.” भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने मांझी को मनाने के लिए उनसे बातचीत की है लेकिन अभी तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया है.
बिहार विधानसभा चुनाव दो चरणों में होंगे पहला चरण 6 नवंबर, और दूसरा चरण 11 नवंबर, को मतगणना 14 नवंबर को होगी. एनडीए का मुकाबला तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन से होगा जिससे राजद कांग्रेस और वीआईपी शामिल हैं. एक तरफ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा को सहयोगियों के वोट बैंक की अहमियत समझते हुए सीट शेयरिंग का संतुलित फार्मूला निकलना होगा.
अगले कुछ दिनों में भाजपा को सीट शेयरिंग का फाइनल फार्मूला तय करना होगा, चिराग पासवान उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी, तीनों को साथ रखते हुए नीतीश कुमार की जदयू को भी संतुष्ट रखना होगा एक बड़ी चुनौती है. सूत्रों के अनुसार भाजपा नेतृत्व गहन मंथन में जुटा है, और जल्द ही सहयोगियों के साथ आम सहमति बनाने का प्रयास करेगी.