जहां 504 वोटो से शुरू हुई जंग, 14,000 वोटो की जीत में बदल गई, जाने बरौली विधानसभा सीट का चुनावी समीकरण..!

Baruli vidhanshabha seat: गोपालगंज जिले का बरौली विधानसभा क्षेत्र बिहार की उन चुनावी सीटों में शामिल है, जहां राजनीतिक समीकरण हर 5 साल में नया रूप ले लेती है. यह वह सीट है जहां दो दिग्गज नेताओं ने तीन दशकों तक एक दूसरे को चुनौती दी और मतदाताओं ने हर बार अपनी स्वतंत्रत राय से चौंकाने वाले फैसला किया. एक तरफ भाजपा के रामप्रवेश राय और दूसरी तरफ आरजेडी के मोहम्मद नेमतुल्लाह.

बरौली की राजनीति में 1995 से लेकर के 2020 तक रामप्रवेश राय और निमतुल्लाह के बीच मुकाबला रहा. बिहार की सबसे लंबी और रोमांचक राजनीतिक पप्रतिद्वंदियों में से एक रही है. इन दोनों नेताओं ने बारी बारी से एक दूसरे को हराया है. जो इस क्षेत्र की राजनीति और स्थिरता और मतदाताओं की बदलती प्राथमिकता को दर्शाता है ल. 1995 में नेमतुल्लाह ने रामप्रवेश राय को हराकर पहली बार अपनी ताकत का परिचय दिया, फिर 2000 में 2005 फरवरी, 2005 अक्टूबर, और 2010 रामप्रवेश राय का स्वर्णिम दौर रहा, उन्होंने लगातार चार चुनाव में नेमतुल्लाह को करारी हार दी, फिर 2015 में नेमतुल्लाह ने महज 504 वोटो के अंतर से रामप्रवेश राय को हरा दिया, फिर 2020 में रामप्रवेश राय की वापसी हुई उन्होंने राजेडी के रियाजुल हक राजू को 14155 वोटो के अंतर से हराया.

बिहार में 2025 विधानसभा चुनाव दो चरणों में होने वाले हैं, ओर 14 नवम्बर को मतगणना होगी बरौली विधानसभा में इस बार फिर से एनडीए और महागठबंधन के बीच सीधी टक्कर होगी. क्या राम प्रवेश राय अपनी जीत की हैट्रिक पूरी करेंगे? या फिर महागठबंधन 2015 जैसे करिश्मा दोहरा पाएगी? जवाब मिलेगा 14 नवम्बर को जब बरौली के मतदाता एक बार फिर बिहार की राजनीति दिशा तय करने में अपनी भूमिका निभाएंगे.

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