तेजस्वी यादव का यह ऐलान भले ही राजनीति के एक मंच से की गई महज घोषणा लग रही हो लेकिन इसका एक मतलब भी है. क्योंकि तेजस्वी का यह बयान सिर्फ एक व्यक्तिगत घोषणा नहीं था,बल्कि बिहार की राजनीति और खासकर महागठबंधन में संभावित बदलाव की दिशा का संकेत है. क्योंकि महागठबंधन से मुख्यमंत्री का चेहरा कौन होगा इसको लेकर पूछे गए सवाल पर राहुल गांधी मुकर गए थे. खैर
वोटर अधिकार यात्रा के समापन कार्यक्रम में तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार पर हमला बोलते हुए उन्हें नकलची कह दिया. राजद नेता ने आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार उनकी योजनाओं की नकल कर जनता के सामने पेश कर रही है. तेजस्वी ने इस दौरान यह भी कहा कि तेजस्वी आगे-आगे चल रहा है और सरकार पीछे-पीछे उसकी नकल कर रही है. सिर्फ यह नहीं तेजस्वी ने सवाल उठाते हुए भीड़ से पूछा की आपको ओरिजिनल मुख्यमंत्री चाहिए या डुप्लीकेट ? भले ही तेजस्वी का यह सवाल नीतीश को लेकर था, लेकिन निशाने पर कांग्रेस समेत दूसरे सभी सहयोगी भी थे.जो सीधे तौर पर यह संदेश देने का प्रयास था कि महागठबंधन हो या राज्य मुख्यमंत्री पद के लिए असली विकल्प वही हैं.
नीतीश कुमार को नकलची सरकार के रूप में प्रस्तुत करते हुए आरा की रैली में तेजस्वी ने जनता को यह भरोसा दिलाया कि उनका नेतृत्व बिहार के लिए सबसे उपयुक्त है. उन्होंने वोटर अधिकार यात्रा को ऐतिहासिक बताया और यह दावा किया कि लाखों लोगों का समर्थन उनके साथ है. तेजस्वी ने भाजपा पर भी निशाना साधा और कहा कि भाजपा के लोग उनके विजन से डरते हैं, लेकिन वे बहुत कुछ सामने लाने वाले हैं. उनका कहना था कि जो योजनाएं वे लागू करेंगे,वह बिहार के लिए पूरी तरह से नए दिशा-निर्देश तय करेंगी.
इसमें कोई संदेह नहीं कि बिहार की राजनीति एक नई दिशा की ओर बढ़ रही है, और तेजस्वी यादव ने अपने इस ऐलान के साथ महागठबंधन की राजनीतिक परिपाटी में अपने नेतृत्व की संभावनाओं को खुला छोड़ दिया है. हालांकि यह भविष्यवाणी करना मुश्किल है कि क्या उनका यह बयान आने वाले चुनावों में महागठबंधन के लिए सफल साबित होगा,लेकिन यह निश्चित रूप से बिहार के राजनीतिक विमर्श खासकर महागठबंधन में एक नई बहस का आगाज है. जिसके कारण राजनीतिक पटल पर बदलाव की गूंज और तेजस्वी के नेतृत्व के लिए खुला मैदान शायद अब और भी दिलचस्प हो जाएगा.