Bihar Politics : बिहार विधानसभा चुनाव अब सिर पर हैं तो जाहिर है राजनीतिक दल अपनी पूरी ताकत झोंकने में लगे हैं. हालांकि प्रचार प्रसार के रेस में विपक्ष थोड़ा आगे है और आगे आगे चलने की जल्दी में विपक्ष ने एक ऐसी गलती की है जो उसकी पूरी नैया डुबा सकती है.
बता दें कि चुनाव आयोग द्वारा बिहार में कराई गई SIR के विरोध और चुनाव आयोग पर राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों को लेकर महागठबंधन (आरजेडी-कांग्रेस-लेफ्ट-वीआईपी) ने राहुल गांधी के नेतृत्व में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ निकाला, जिसमें वे बिहार के विभिन्न हिस्सों में जनता से जुड़ रहे हैं और चुनाव आयोग द्वारा की गई वोटर लिस्ट रिवीजन पर सवाल उठा रहे थे. इस यात्रा में तेजस्वी यादव भी राहुल गांधी के साथ दिखाई दे रहे हैं.यह यात्रा जब दरभंगा पहुंची तो कांग्रेस नेता मोहम्मद नौशाद द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में मंच से एक समर्थक द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां के लिए अपशब्द का प्रयोग किया गया. हालांकि उस व्यक्ति की गिरफ्तारी हो चुकी है लेकिन मामला ने तूल पकड़ लिया. कयास लगाए जा रहे कि राहुल की यह यात्रा बिहार चुनाव के लिए कोई बड़ा टर्निंग पॉइंट बन सकती है या फिर यह मामला राहुल-तेजस्वी की वोटर अधिकार यात्रा के साथ साथ चुनाव भी डुबो ले जाएगी ?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अपशब्दों की इस घटना ने विपक्षी गठबंधन की राजनीति को कठिनाइयों में डाल दिया है. बीजेपी जो पहले ही बिहार में अपनी स्थिति मजबूत करने में लगी थी,अब इस मुद्दे को अपने पक्ष में भुनाने की पूरी कोशिश कर रही है. बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के नेताओं ने इस घटना को लेकर विपक्ष को घेरना शुरू कर दिया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को अगर थोड़ी भी शर्म है तो उन्हें मोदी जी और उनकी दिवंगत माँ के लिए कही गई अपशब्दों पर माफी मांगनी चाहिए.
बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के नेताओं का कहना है कि यह घटना विपक्षी मानसिकता की झलक है, जो देश के सबसे बड़े नेता और उनकी मां के प्रति अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करने से भी नहीं चूकते. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, लोजपा (रामविलास)के नेता चिराग पासवान, जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा सहित बिहार के सभी प्रमुख नेताओं ने कांग्रेस और आरजेडी पर हमला बोला है.
यह घटनाक्रम बिहार चुनाव में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट बन सकता है. बीजेपी इस मुद्दे को जमकर भुना रही है और यह मुद्दा बिहार में प्रचार की दिशा को बदलने में सक्षम हो सकता है. पीएम मोदी पर किए गए आरोपों का पहले भी जोर-शोर से प्रचार किया गया था,जैसे चायवाला, गंगू तेली, बोटी-बोटी, नीच किस्म का आदमी आदि. बीजेपी इस तरह की अपमानजनक टिप्पणियों को चुनावी मुद्दे में बदलने की तैयारी कर रही है.
कांग्रेस और आरजेडी के लिए यह बड़ी राजनीति की भूल हो सकती है, जो बिहार विधानसभा चुनाव से पहले इस तरह की विवादित स्थिति में फंसा गई हैं. लेकिन क्या वे इस गलती को सुधार पाते हैं या यह एक बड़ा नुकसान साबित होगा? हालांकि आने वाले हफ्तों में यह साफ हो जाएगा लेकिन एक बात निश्चित है,यह घटना बिहार चुनाव के माहौल को प्रभावित करेगी और विपक्ष को इससे उबरने के लिए कड़ी चुनौती मिलेगी. बिहार के चुनावी समर में अब यह सवाल उठता है कि क्या विपक्ष इस छोटी सी गलती के कारण अपनी बड़ी राजनीतिक लड़ाई हार जाएगा?