Bihar elections : राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के नेतृत्व में विपक्ष बिहार चुनाव से पहले नैरेटिव सेट करने में लगी है. लेकिन उससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया बिहार दौरे ने साफ कर दिया है कि भारतीय जनता पार्टी चुनावी एजेंडा पहले ही सेट कर चुकी है। जानकारों की मानें तो NDA सरकार द्वारा गया की रैली सिर्फ राजनीतिक शक्ति-प्रदर्शन नहीं थी, बल्कि एक संदेश था, भ्रष्टाचार बीजेपी का सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा होगा।
गया के मंच पर प्रधानमंत्री मोदी के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और एनडीए के तमाम दिग्गज मौजूद थे, लेकिन सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरीं आरजेडी की दो विधायकों, विभा देवी और प्रकाश वीर की मौजूदगी ने। यह न सिर्फ महागठबंधन के लिए झटका है, बल्कि बीजेपी की रणनीति का संकेत भी। विभा देवी, जो आरजेडी के पूर्व विधायक राजबल्लभ यादव की पत्नी हैं, हाल ही में पार्टी से किनारा करके एनडीए के मंच पर पहुंचीं। यह कदम बताता है कि बीजेपी विपक्षी खेमे में सेंध लगाने से नहीं चूकेगी।
जब विपक्ष कांग्रेस और तेजस्वी यादव के नेतृत्व में वोटर अधिकार यात्रा निकाल रहा है, जिसमें वोट चोरी- सत्ता चोरी का नारा गूंज रहा है, तब बीजेपी ने भ्रष्टाचार का मुद्दा आगे रख दिया है। मोदी ने साफ कहा कि छोटे कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई होती है, लेकिन बड़े नेताओं के लिए जेल भी सत्ता का केंद्र बनी रहती है। इसी बहाने उन्होंने प्रस्तावित कानून का जिक्र किया, जिसमें पीएम, सीएम या मंत्री को गिरफ्तारी के 30 दिन में जमानत न मिलने पर कुर्सी छोड़नी होगी। बिल को तत्काल पारित करने की बजाय संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजा गया है। इससे स्पष्ट है कि सरकार अभी सिर्फ मुद्दा जीवित रखना चाहती है, ताकि बिहार चुनाव से पहले यह बहस चरम पर पहुंच सके।
मोदी ने अपने भाषण में भ्रष्टाचार को सीधे जंगलराज से जोड़ा। लालू-राबड़ी शासन काल का हवाला देते हुए उन्होंने शिक्षा, रोजगार और सुरक्षा की दुर्दशा का जिक्र किया।जिसका संदेश साफ था बीजेपी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को बिहार के पुराने जख्मों से जोड़कर वोटरों को याद दिलाना चाहती है कि सुशासन बनाम जंगलराज ही चुनावी विकल्प है। इसके अलावा बीजेपी की रणनीति का एक और पहलू है, नीतीश कुमार की सुशासन छवि को अपने खेमे में समाहित करना। भ्रष्टाचार के खिलाफ कठोर कानून और जंगलराज का हवाला देकर बीजेपी यह दिखाना चाहती है कि नीतीश के सुशासन की विरासत अब एनडीए के खाते में दर्ज होगी।
भले चुनाव और रैली बिहार में हो लेकिन मोदी ने लालू-राबड़ी ही नहीं, बल्कि अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी को भी भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेरा। साथ ही, एक बार फिर पहलगाम आतंकी हमले के बाद “ऑपरेशन सिंदूर” का उल्लेख कर सुरक्षा-राष्ट्रवाद का पन्ना भी जोड़ा। एक तरफ भ्रष्टाचार विरोध, दूसरी तरफ सख्त राष्ट्रवाद का दोहरा संदेश था. बिहार की चुनावी जमीन पर बीजेपी ने साफ संकेत दे दिया है कि विपक्ष की वोट चोरी की बहस के मुकाबले वह भ्रष्टाचार को ज्यादा धारदार मुद्दा मानेगी। महागठबंधन में सेंध लगाना, नीतीश कुमार की विरासत अपने नाम करना और लालू-राबड़ी के ‘जंगलराज’ को फिर से राजनीतिक विमर्श में लाना यही इस रणनीति के तीन मुख्य स्तंभ हैं। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि वोटरों के लिए कौन-सा नैरेटिव ज्यादा असरदार साबित होता है, वोटर अधिकार या भ्रष्टाचार-मुक्त शासन?