सामाजिक न्याय की लड़ाई का अखाड़ा, वामपंथी राजनीति का गढ़..अरवल विधानसभा सीट

Bihar assembly election 2025:अरवल विधानसभा सीट बिहार विधानसभा की 243 सीटों में से एक है, और जहानाबाद लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है. अरवल जिला बिहार के दक्षिणी भाग में स्थित है, और इसका गठन 2001 में जहानाबाद जिले से अलग करके किया गया था. ये एक अपेक्षाकृत छोटा जिला है, लेकिन राजनीतिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है. जिले की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है. यहां दलित और पिछड़ा वर्ग की उपस्थिति महत्वपूर्ण है.

चुनावी इतिहास

अरवल विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास काफी दिलचस्प रहा है. यह विभिन्न राजनीतिक दलों का प्रभाव देखने को मिला है. 2020 विधानसभा चुनाव में इस सीट पर महानंद सिंह ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी लिबरेशन के टिकट पर जीत हासिल की थी. यह जीत काफी महत्वपूर्ण थी क्योंकि इसमें वामपंथी राजनीति की मजबूती का संकेत था.

सामाजिक रूपरेखा

अरवल की जनसंख्या में विविधता देखने को मिलती है. यह दलित, पिछड़ी जाति और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. कृषि क्षेत्र का मुख्य व्यवसाय है, लेकिन भूमि सुधार और सामाजिक न्याय के मुद्दे यहां की राजनीति को प्रभावित करते हैं.
वामपंथी दलों की मजबूत उपस्थिति इस क्षेत्र की विशेषताओं को बढ़ाती है जो सामाजिक न्याय और भूमि अधिकारों के मुद्दे पर केंद्रित नजर आ रही हैं.

पिछले 2 चुनाव के नतीजे

2015
विजेता उम्मीदवार–रविंद्र कुमार (RJD) को 55,295 मत मिले, वही दूसरी ओर चितरंजन कुमार (BJP) को 37,485 मत मिले, जीत का मार्जिन 14,810 वोट रहा, लगभग वोट प्रतिशत विजेता का 42.60% और रनर-अप का 28.90% रहा

2020
विजेता उम्मीदवार– महानंद सिंह (CPI(ML)(Liberation)) को 68,286 मत मिले, वही दूसरी ओर दीपक कुमार शर्मा (BJP) को 48,336 मत मिले, जीत का मार्जिन 19,950 वोट रहा, लगभग वोट प्रतिशत विजेता का 47.18% और रनर-अप का 33.40% रहा

अलवर  विधानसभा सीट बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है. यहां की राजनीति विकास और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर केंद्रित है. मतदाताओं की जागरूकता और उनकी अपेक्षाओं के आधार पर यहां की राजनीतिक तस्वीर निरंतर बदलती रहती है.

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