बिहार विधानसभा चुनाव 2025: बिहार के दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान की सीट ( अनुसूचित जाति आरक्षित) मिथिला की राजनीति और संस्कृति दोनों में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं. यह विधानसभा समस्तीपुर (एससी) लोकसभा सीट का हिस्सा है और दरभंगा जिला मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर दक्षिण पूर्व तथा पटना से करीब 145 किलोमीटर उत्तर पूर्व में स्थित है. कुशेश्वर नाथ स्थान का नाम यहां स्थित बाबा कुशेश्वर नाथ मंदिर से जुड़ा हुआ है मानता है कि इसकी स्थापना भगवान राम के पुत्र कृष्ण की थी सावन और महाशिवरात्रि के समय हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं उमड़ते हैं.
अगर कुशेश्वरस्थान वविधानसभा की राजनीति की बात करे तो पिछले 45 वर्षो से दो परिवारों की परंपरा और प्रतिद्वंद्वी पर टिकी हुई है. पूर्व मंत्री स्वर्गीय बालेश्वर राम और पूर्व सांसद रामजतन पासवान की राजनीतिक विरासत अब उनकी तीसरी पीढ़ी तक पहुंच गई है दिलचस्प यह है कि जो परिवार कभी अलग-अलग दलों से लड़ता था अब एक ही दल के तहत सक्रिय हो गया है.
राजनीति की टकराव 1980 के लोकसभा चुनाव के बाद से दोनों परिवार में हुए रामजतन पासवान ने तो चुनाव नहीं लड़े, लेकिन अपने भतीजे रामसेवक हजारी को जनता पार्टी से मैदान उतरा. वहीं कांग्रेस प्रत्याशी बालेश्वर राम से उनका मुकाबला हुआ जिसमें बालेश्वर राम विजय हुए. लगातार इस क्षेत्र के लिए पीढ़ियों में लड़ाई हुई.
1985 की बात हो या 1990 विधानसभा चुनाव में बालेश्वर राम के पुत्र डॉ अशोक कुमार ने रामजतन पासवान को परास्त कर दिया था 1995 के चुनाव में रामजतन की जगह उनके छोटे भतीजे शशि भूषण हजारी उतरे लेकिन वह भी डॉक्टर अशोक कुमार से हार गए.
अब बारी है तीसरी पीढ़ी की स्वर्गीय बालेश्वर राम के परिवार से डॉक्टर अशोक कुमार के पुत्र राजनीति में सक्रिय हैं वहीं रामजतन पासवान के परिवार से पूर्व मंत्री महेश्वर हजारी के पुत्र शनि हजारी राजनीति में कदम बढ़ा रहे हैं.
पहली बार ऐसा हुआ है कि दोनों परिवार एक ही दर के तहत सक्रिय है. ऐसे में टिकट की दावेदारी को लेकर परिवार के बीच दल के अंदर ही टकराव देखने को मिल सकता है. इस चुनाव को दोनों परिवार के लिए चुनावी राजनीति का अनोखा प्रयोग माना जा रहा है जहां दसको पुरानी दुश्मनी के बावजूद अब तीसरी पीढ़ी एक ही मंच पर एक ही साथ खड़ी हैं.