गंगा किनारे बसा मुंगेर किला…बिहार का ऐतिहासिक विरासत और धार्मिक धरोहर

Munger fort: बिहार की धरती अपने ऐतिहासिक विरासत और धार्मिक धरोहर के लिए जानी जाती है. इसी तरह बिहार के मुंगेर शहर में गंगा नदी के किनारे स्थित मुंगेर किला भारत की प्राचीन विरासत और स्थापत्य कला का एक अनोखा नमूना है. मुंगेर किला इतिहास   के सम्राटों और सुल्तानों के साथ कल की गवाही देता है बल्कि आज भी यह किला आस्था संस्कृति और परंपरा का जीवंत प्रतीक हैं.

मुगलों से लेकर अंग्रेजी हुकूमत तक का  इतिहास

मुंगेर किले का इतिहास 6वीं शताब्दी से जुड़ा माना जाता है.बाद में तुगलक खिलजी और मुगलों ने भी इसे विस्तार दिया. अंग्रेजी हुकूमत के दौरान भी यह किला उनकी योजनाओं में अहम रहा. मुगलों के दौर में इस किले की भव्यता और भी बढ़ गई थी किले की वास्तुकला मध्यकालीन शैली को दर्शाती है. पत्थर और ईट से बने विशाल दरवाजा ऊंची दीवारें किले की दोनों और गंगा की धारा जो इस इमारत की आज भी बीते युग की झलक को दिखाता है.

प्रमुख स्थल….

सीता कुंड पीर बाबा की मजार श्री कृष्णा वरुण मंदिर यह तीनों ही प्रमुख स्थल है, जहां सीता कुंड में किले परिसर में स्थित या प्रसिद्ध गर्म पानी का कुंड धार्मिक महत्व रखता है माना जाता है कि सीता माता ने यहां स्नान किया था फिर, वही पीर बाबा की मजार किले में हिंदू और मुसलमान दोनों धर्म के लोगों के बीच के आस्था का केंद्र बना हुआ है वही कृष्णा वर्णन मंदिर भी किले के भीतर आस्था और आध्यात्मिकता का केंद्र है.

बिहार की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर

मुंगेर किला सिर्फ पुराना किला नहीं बल्कि इतिहास आस्था और संस्कृति का जीवंत प्रतीक है छठ पर्व और कार्तिक महीने में मुंगेर किला श्रद्धालुओं से गुलजार रहता है. यहां न केवल स्थानीय लोग बड़ी देश भर से श्रद्धालुओं पर्यटक आस्था और इतिहास की झलक देखने पहुंचते हैं आज मुंगेर किला केवल इतिहास और धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं रहा बिहार सरकार ने पुरातत्व विभाग की पहल से इसे पर्यटन स्थल के रूप में भी विकसित करने की राह पर है. किले परिसर और गंगा के किनारे का मनमोहक दृश्य पर्यटकों को आकर्षित करता है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *