पुरानी संस्कृति से जुड़े इस विधानसभा सीट पे क्या फिर से महागठबंधन का जादू चलेगा या एनडीए करेगी वापसी?

Bihar assembly election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा अभी हुई नहीं है, लेकिन जहानाबाद जिले की घोसी सीट पर राजनीतिक शोर सुनाई दे रहा है. घोसी निर्वाचन क्षेत्र में भी संभावित उम्मीदवार जनता के बीच पहुंच रहे हैं, और अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं. इस सीट पर इस समय महागठबंधन का कब्जा है. जहां भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) के रामबली सिंह विधायक है.

पुरानी संस्कृति से जुड़ा है घोसी

घोसी निर्वाचन क्षेत्र जहानाबाद जिले के अंतर्गत आता है. यह इलाका मगध क्षेत्र की कृषि और सांस्कृतिक परंपराओं से गिरा हुआ है. यहां की एक खास बात यह है कि मतदाता पार्टियों के बजाय उम्मीदवार के व्यक्तित्व और कार्यों को देखकर अपना समर्थन देते हैं. इस कारण यह व्यक्तित्व की राजनीति हावी रहती है. घोसी में अनुसूचित जाति की अच्छी खासी आबादी है जो कुल मतदाताओं का लगभग 20% है.वही मुस्लिम मतदाता करीब 5% है यह जातीय संरचना चुनावी समीकरण को प्रभावित करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आ रहे हैं.

पिछले 2 चुनाव के नतीजे

घोसी विधानसभा सीट पर पिछले दो चुनाव के नतीजे काफी दिलचस्प रहे हैं. जहां 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में इस सीट पर जदयू के कृष्णानंद प्रसाद वर्मा ने जीत दर्ज की थी. उन्होंने हम के प्रत्याशी राहुल कुमार को 21,625 वोटो के बड़े अंतर से हराकर सीट अपने नाम की थी. वहीं 2020 के चुनाव में समीकरण बदल गया और इस बार मैदान में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से रामबली सिंह यादव खड़े हुए उन्होंने जनता दल यूनाइटेड के उम्मीदवार राहुल कुमार को कड़े मुकाबले में 17,333 वोटो के अंतर से हराया था. पिछले दोनों चुनाव के परिणामों से साफ है, कि घोसी सीट पर मतदाता समय-समय पर अलग-अलग दलों को मौका देते आ रहे हैं, और यहां का चुनाव जातीय समीकरणों स्थानीय मुद्दों और गठबंधन की रणनीति पर तो निर्भर नहीं करता है.

इस बार के मुख्य मुद्दे और चुनौती

घोसी क्षेत्र की मुख्य समस्याएं कृषि, विकास, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा हुआ है. यहां के मतदाता इन्हीं मुद्दों के आधार पर अपना फैसला करते हैं. अब जो पार्टी इस समय इस विधानसभा सीट पर है उसके लिए चुनौती भी उतनी ही बड़ी है युवाओं में बदलाव की लहर देखकर, आर्थिक मुद्दों पर सवाल उठाने वाले, केंद्र सरकार की योजनाओं का प्रभाव भी पड़ सकता है.

घोसी विधानसभा क्षेत्र में आगामी चुनाव कड़े मुकाबले का होने वाला है. जहां रामबली सिंह की व्यक्तिगत साख और महागठबंधन का समर्थन उनके पक्ष में है वहीं एनडीए भी अपनी संगठनात्मक शक्ति के साथ मजबूत उम्मीदवार उतार सकती है. एक तरफ जन स्वराज पार्टी का प्रवेश राजनीति में एक नया आयाम जोड़ रहा है . अब देखना दिलचस्प होगा की घोसी के मतदाता विकास व्यक्तित्व और स्थानीय मुद्दों के आधार पे क्या निर्णय लेते है.

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