BJP Bihar Ticket Distribution Strategy : बिहार विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने टिकट बंटवारे की रणनीति लगभग तय कर ली है. मीडिया सुत्रों के हिसाब से पार्टी इस बार राजस्थान और मध्य प्रदेश की तर्ज पर ही बिहार में भी बड़ा दांव खेलने की तैयारी में है. जो जानकारी सामने आया है उस हिसाब से एक तरफ जहां भाजपा अपने केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों को चुनावी मैदान में उतारने जा रही है वहीं दूसरी तरफ 25-30 मौजूदा विधायकों के टिकट काटे जाने की भी संभावना है. पार्टी सूत्रों के मुताबिक 4-5 अक्टूबर को चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान, सह प्रभारी केशव प्रसाद मौर्य और सीआर पाटिल ने पटना में प्रदेश नेतृत्व की कोर कमेटी के साथ लंबी बैठक में उम्मीदवारों की सूची पर चर्चा कर इसे केंद्रीय चुनाव समिति को भेज दिया गया है. जिसके बाद अब अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व करेगा.
इस इन विधायकों को नहीं मिलेगा टिकट
जो खबर सामने आ रही है उस हिसाब से BJP इस बार नए चेहरे लाकर एंटी इनकंबेंसी को कम करने की रणनीति पर काम कर रही है. पार्टी का जोर खासतौर पर उन विधायकों को बाहर करने पर है जिनसे नाराजगी या संगठनात्मक चुनौती रही है. 2024 में NDA सरकार बनने के दौरान हुए फ्लोर टेस्ट में कुछ BJP विधायकों ने पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर विपक्ष को समर्थन दिया था. तब डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि पार्टी ऐसे विधायकों से हिसाब करेगी. सूत्रों के मुताबिक इस सूची में रश्मि वर्मा, मिश्री लाल यादव और भागीरथी देवी जैसे नाम प्रमुख हैं.
इसके अलवा BJP इस बार भी उम्रदराज नेताओं को टिकट नहीं देने की नीति पर कायम है. पार्टी सूत्रों के अनुसार, 70 वर्ष से ऊपर के 12-15 विधायक टिकट की रेस से बाहर हो सकते हैं.पार्टी का मानना है कि इस फैसले से न केवल एंटी इनकंबेंसी घटेगी बल्कि नए चेहरों को मौका मिलेगा. वहीं BJP के आंतरिक सर्वे में कई विधायकों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर नाराजगी सामने आई है. पार्टी ऐसे 5-6 विधायकों को टिकट नहीं देने पर विचार कर रही है, जिन्हें ‘नॉन-परफॉर्मिंग’ की कैटेगरी में रखा गया है.
80-90% सीटें जीतने का लक्ष्य
इससे पहले 27 सितंबर को पटना पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोर कमेटी के साथ चुनावी रणनीति पर विशेष बैठक की थी. सूत्रों के मुताबिक, शाह ने कहा कि इस बार पार्टी को 80-90% सीटों पर जीत सुनिश्चित करनी होगी. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसके लिए जरूरत पड़ने पर मौजूदा विधायकों के टिकट काटने या बड़े नेताओं को मैदान में उतारने से पीछे नहीं हटना चाहिए.
केंद्रीय मंत्री और सांसद उतरेंगे चुनावी मैदान में
मध्य प्रदेश और राजस्थान विधानसभा चुनाव की तरह ही बिहार में भी BJP दांव खेल सकती है. सूत्रों का कहना है कि पार्टी 6 से ज्यादा सांसदों और पूर्व सांसदों को विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बना सकती है. इनमें केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और नित्यानंद राय के नाम सबसे चर्चित हैं. साथ ही हारे हुए पूर्व सांसद रामकृपाल यादव, सुशील सिंह और अश्विनी चौबे को भी चुनाव मैदान में उतारा जा सकता है. BJP की रणनीति साफ है कि पार्टी एंटी इनकंबेंसी को तोड़ने और संगठन की पकड़ मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर बदलाव करने को तैयार है. पार्टी का मानना है कि नए चेहरों और केंद्रीय नेताओं को उतारकर वह मतदाताओं में नया उत्साह पैदा कर सकती है और विपक्ष को चौंका सकती है. अब निगाहें केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक पर टिकी हैं, जहां उम्मीदवारों की अंतिम सूची पर मुहर लगेगी. इस सूची से साफ हो जाएगा कि किन नेताओं का राजनीतिक भविष्य दांव पर लगा है और किन नए चेहरों को मौका मिलेगा.