किसका पासा पलटेगा इस बार, जहां निर्दलीय से लेकर राजद तक ने आजमाई किस्मत..!

Obra Vidhansabha seat: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारी जोरों पर हैं, ऐसे में ओबरा विधानसभा क्षेत्र एक बार फिर चर्चे में हैं. काराकाट लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली यह सामान्य सीट अक्टूबर–नवंबर 2025 में होने वाले विधानसभा चुनावो में एक बार फिर सुर्खियों मे हैं. पिछले 2 चुनाव में राजद का यहां दबदबा रहा है लेकिन, इस बार एनडीए के घटक दल इस सीट को वापिस लेने के लिए कमर कस चुके हैं.

 

ओबरा विधानसभा क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण आबादी वाला इलाका है जहां सामाजिक संरचना काफी है यह भूमिहार यादव दलित और अल्पसंख्यक समुदाय के महत्वपूर्ण उपस्थिति है जिसके कारण जातिगत समीकरण चुनावी नतीजे को गहराई से प्रभावित करती आई है.

 

2015 के विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल ने ओबरा पर अपना परचम लहराया राजद के वीरेंद्र कुमार सिन्हा ने राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के चंद्रभूषण वर्मा को 11,396 वोटो से हराकर जीत दर्ज की थी. इस चुनाव में वीरेंद्र कुमार को 56,042 वोट मिले जबकि उसके प्रतिद्वंद्वी को 44,646 वोट प्राप्त हुए. यह वह दौर था जब पूरे बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के पक्ष में हवा बह रही थी. लेकिन, ओबरा की जनता ने महागठबंधन को अपना समर्थन दिया था.वहीं 2020 के विधानसभा चुनाव में राजद ने ओबरा सीट पर अपनी जीत को न केवल बरकरार रखा बल्कि, और मजबूत बना लिया. इस बार पार्टी ने नए चेहरे ऋषि कुमार को मैदान में उतरा जिन्होंने लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के प्रकाश चंद्र को 22,668 वोटो के बड़े अंतर से पराजित किया. ऋषि कुमार को कल 63,662 वोट प्राप्त हुए, जबकि प्रकाश चंद्र को 40,994 के करीब वोट मिले यह चुनाव त्रिकोणीय मुकाबले की तरह शुरू हुआ था. जिसमें जेडीयू भी प्रतिस्पर्धा में थी, लेकिन अंत तक मुख्य लड़ाई राजद और लोजपा के बीच सिमट गई.

 

आगमी विधानसभा चुनाव 2025 में ओबरा सीट पर एक बार फिर रोमांचक मुकाबला होने की संभावना है. एक तरफ राष्ट्रीय जनता दल लगातार तीसरी बार अपनी जीत दौरान की कोशिश में जुटी हुई है. वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी(BJP) जनता दल यूनाइटेड(JDU) और लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के गठबंधन वाला एनडीए इस सीट को जीतने के लिए कमर कर चुका है. विपक्ष की तरफ से राजद कांग्रेस और अन्य दलों का गठबंधन में मजबूत रणनीति के साथ चुनाव में उतरने को तैयार हो चुका है. पिछले चुनाव के परिणामों को देखते हुए यह कहा जा सकता है, कि ओबरा में जीत का फैसला जातीय समीकरण स्थानीय नेतृत्व की विकास के मुद्दों पर निर्भर करेगा.

 

ओबरा की सियासी जमीन ने पिछले तीन चावन में तीन अलग-अलग विजेता देखे हैं जो इस सीट की अप्रत्याशित राजनीतिक प्रकृति को दर्शाता है. अब देखना यह होगा कि 2025 का चुनाव क्या तय करेगा राजद अपनगढ़ बचा पाएगी या फिर एनडीए इस सीट को अपने खाते में डालने में सफल होगी.

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