Why BJP winning Bengal : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी का कमल खिलने जा रहा. चुनाव आयोग के नतीजों में भगवा पार्टी लगभग 200 सीटों पर बढ़त बनाकर ना सिर्फ बहुमत बल्की अपने अनुमान को भी पार कर लिया है. भाजपा के इस शानदार रिकॉर्ड प्रदर्शन से ममता बनर्जी का सपना टुटते दिख रहा है. चुनावी नतीजों के साथ साथ यह भी चर्चा है कि बंगाल में भाजपा की जीत के क्या कारण हैं. राजनीतिक जानकारों की मानें तो इस प्रदर्शन के पीछे पांच प्रमुख हैं. जिनमें महिलाओं का समर्थन, सरकारी कर्मचारियों का झुकाव, केंद्र की योजनाएं, सुरक्षा व्यवस्था और मतदाता सूची शुद्धिकरण (SIR) शामिल हैं.
महिलाओं का समर्थन बना निर्णायक
जानकारों का कहना है कि बंगाल में भाजपा महिलाओं के लिए आरक्षण से जुड़ी पहल और विपक्ष को महिला विरोधी बताने वाला नैरेटिव सेट करने में सफल हो गई. चुनाव आयोग के जो आकंड़े हैं उसके हिसाब से 2026 के चुनाव में महिलाओं का वोट लगभग 5% तक बीजेपी के पक्ष में झुका हो सकता है. राज्य में महिला और पुरुष मतदाताओं की संख्या लगभग बराबर है, जिससे यह वर्ग निर्णायक साबित हुआ.
सरकारी कर्मचारियों और युवाओं पर फोकस
इसके अलावा जानकारों का यह दावा भी है कि महंगाई भत्ता (DA), पेंशन और सातवें वेतन आयोग जैसे मुद्दों ने 20 से 50 लाख मतदाताओं को प्रभावित किया. गृह मंत्री Amit Shah ने बंगाल में चुनावी प्रचार के दौरान अपने परिवर्तन यात्रा में सत्ता में आने पर 45 दिनों के भीतर सातवां वेतन आयोग लागू करने और सरकारी नौकरियों में भर्तियां करने का वादा किया था. जिसकों लेकर सरकारी कर्मचारियों और युवाओं का भरोसा पार्टी के प्रति कायम हुआ. जो अब नतीजों में झलक रहा है.
केंद्र सरकार के विकास मॉडल पर जोर
इसके साथ साथ भाजपा नें प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में केंद्र की योजनाओं और विकास कार्यों को प्रमुख मुद्दा बनाया. जानकारों का दावा है कि यह नैरेटिव मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के खिलाफ गया और खासकर युवाओं तथा पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं को प्रभावित किया.
सुरक्षा और एंटी-इन्कम्बेंसी फैक्टर
बीजेपी ने राज्य में चुनावी हिंसा और कानून-व्यवस्था को बड़ा मुद्दा बनाया. राजनीतिक जानकार कहते हैं कि बंगाल में चुनाव के दौरान डर का माहौल होना सबसे बड़ा फैक्टर साबित होता रहा हैं. जिसकों दूर करने के लिए भाजपा ने केंद्र की सत्ता होने का फायदा उठाया और केंद्रीय बलों की भारी तैनाती और संगठनात्मक नेटवर्क ने मतदाताओं में विश्वास पैदा किया, जिससे वे बिना डर वोट डाल सके. इसके साथ ही टीएमसी सरकार के खिलाफ एंटी-इन्कम्बेंसी भी असरदार रही.
मतदाता सूची शुद्धिकरण (SIR) और आउटसाइडर मुद्दा
राजनीतिक जानकार SIR प्रक्रिया को भी सफलता का बड़ा कारण बताते हैं. उनके मुताबिक इस प्रक्रिया से वास्तविक मतदाताओं को वोट देने का मौका मिला. बताया जा रहा है कि इस दौरान लाखों नाम मतदाता सूची से हटाए गए, जबकि कुल मतदान में बढ़ोतरी दर्ज हुई. कूल इन सभी कारकों के संयुक्त प्रभाव ने पश्चिम बंगाल में पार्टी को अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन करने में मदद की. हालांकि अंतिम नतीजे आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी.