Bihar assistant professor exam : बिहार सरकार राज्य के विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती प्रक्रिया में बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव करने जा रही है. दशकों से चली आ रही केवल इंटरव्यू आधारित नियुक्ति की परंपरा को समाप्त करते हुए अब लिखित परीक्षा को अनिवार्य किया जाएगा. नई प्रस्तावित नियमावली के अनुसार अभ्यर्थियों को 200 अंकों की चयन प्रक्रिया से गुजरना होगा.
200 अंकों की चयन प्रक्रिया
प्रस्तावित नियमों के मुताबिक कुल चयन प्रक्रिया 200 अंकों की होगी. इसमें 160 अंक (80%) लिखित परीक्षा के लिए निर्धारित होंगे और 40 अंक (20%) इंटरव्यू के लिए होंगे. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लिखित परीक्षा वर्णनात्मक (डिस्क्रिप्टिव) स्वरूप में होगी. यानी अभ्यर्थियों को केवल बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) नहीं हल करने होंगे, बल्कि अपने विषय से जुड़े प्रश्नों के विस्तृत उत्तर लिखकर ज्ञान और विश्लेषणात्मक क्षमता का प्रदर्शन करना होगा.
NET और PhD से केवल पात्रता
नई नियमावली में स्पष्ट किया गया है कि NET, JRF या PhD जैसी योग्यताएं केवल पात्रता (Eligibility) के लिए मान्य होंगी. इन डिग्रियों के लिए अलग से अंक नहीं दिए जाएंगे. लिखित परीक्षा से किसी भी प्रकार की छूट नहीं मिलेगी. अनुभव (Experience) के लिए भी अतिरिक्त अंक का प्रावधान नहीं रखा गया है. इसका मतलब है कि चयन पूरी तरह लिखित परीक्षा और इंटरव्यू में प्रदर्शन पर आधारित होगा. नई व्यवस्था में आयु सीमा का भी प्रावधान किया गया है. जिसके तहत न्यूनतम आयु 23 वर्ष रहेगा तो अधिकतम आयु 45 वर्ष होगा. हालांकि आरक्षित वर्गों के अभ्यर्थियों को नियमानुसार आयु सीमा में छूट दी जाएगी.
बिहार एलिजिबिलिटी टेस्ट (BET) दोबारा शुरू करने की तैयारी
राज्य सरकार बिहार एलिजिबिलिटी टेस्ट (BET) को फिर से शुरू करने पर भी विचार कर रही है. इसका उद्देश्य राज्य के प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों को राष्ट्रीय परीक्षाओं के साथ-साथ राज्य स्तर पर भी अपनी योग्यता साबित करने का अवसर देना है. इस संबंध में राज्यपाल की ओर से सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से सुझाव मांगे गए हैं. नई नियमावली का मसौदा भी विश्वविद्यालयों को भेजा गया है और कुलपतियों से 10 दिनों के भीतर अपनी राय देने को कहा गया है. सूत्रों के अनुसार यदि सभी कुलपतियों की सहमति समय पर मिल जाती है तो यह नियमावली 12 मार्च से पहले लागू की जा सकती है.
बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग करेगा भर्ती
नई व्यवस्था के तहत भर्ती प्रक्रिया बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग के माध्यम से कराई जाएगी. इंटरव्यू पैनल में शामिल सभी सदस्य प्रोफेसर रैंक के होंगे ताकि चयन प्रक्रिया की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके. असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए आवेदन करने के लिए अभ्यर्थियों को निम्न में से किसी एक योग्यता को पूरा करना होगा:
- UGC या CSIR द्वारा आयोजित NET पास
- SLET/SET जैसी मान्यता प्राप्त राज्य स्तरीय पात्रता परीक्षा
- संबंधित विषय में PhD डिग्री
- हालांकि PhD धारकों को NET से छूट मिल सकती है, लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें पूरी करनी होंगी.
PhD धारकों के लिए विशेष शर्तें
NET के स्थान पर PhD के आधार पर पात्रता पाने के लिए निम्न शर्तें अनिवार्य होंगी:
- PhD रेगुलर मोड में की गई हो
- शोध प्रबंध का मूल्यांकन कम से कम दो बाहरी परीक्षकों ने किया हो
- ओपन PhD वाइवा आयोजित हुआ हो
- कम से कम दो शोध पत्र प्रकाशित हों, जिनमें से एक रेफरीड जर्नल में हो
इसके अलावा जिन अभ्यर्थियों ने 11 जुलाई 2009 से पहले PhD में नामांकन लिया था, वे उस समय लागू नियमों के आधार पर पात्र माने जाएंगे.
क्यों जरूरी था यह बदलाव
बिहार के सरकारी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में लंबे समय से शिक्षकों के हजारों पद रिक्त हैं. पहले की केवल इंटरव्यू आधारित चयन प्रक्रिया पर अक्सर पारदर्शिता की कमी और भाई-भतीजावाद के आरोप लगते रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि लिखित परीक्षा आधारित पारदर्शी चयन प्रक्रिया लागू होने से योग्य उम्मीदवारों को उचित अवसर मिलेगा और विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता भी बेहतर होगी. नई नियमावली लागू होने के बाद लंबे समय से खाली पड़े शिक्षकों के पदों पर भर्ती का रास्ता साफ हो सकता है, जिससे राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है.