LPG crisis : भारत के कई बड़े शहरों में एलपीजी सिलेंडर की कमी को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है. बेंगलुरु, चेन्नई, मुंबई, पुणे और दिल्ली जैसे महानगरों से होटल और रेस्टोरेंट मालिकों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द सप्लाई सामान्य नहीं हुई तो आने वाले 48 घंटों में बड़ी संख्या में किचन बंद हो सकते हैं. होटल और रेस्टोरेंट एसोसिएशनों के अनुसार कमर्शियल गैस सिलेंडर की उपलब्धता तेजी से घट रही है, जिसके कारण कई प्रतिष्ठानों को संचालन रोकना पड़ रहा है.
कई शहरों में कमर्शियल सिलेंडर की किल्लत
मुंबई में होटल और रेस्टोरेंट उद्योग के प्रतिनिधियों का कहना है कि गैस की कमी का असर सीधे कारोबार पर पड़ रहा है. इंडियन होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय शेट्टी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मुंबई में करीब 20% होटल और रेस्टोरेंट बंद हो चुके हैं. यदि सप्लाई जल्द नहीं सुधरी तो 60–70% प्रतिष्ठान बंद हो सकते हैं. उनके मुताबिक जो कमर्शियल सिलेंडर लगभग ₹1840 का होता है, वह कई जगह ₹3000 तक में बिक रहा है, और फिर भी उसकी उपलब्धता की कोई गारंटी नहीं है.
दिल्ली में भी गैस की कमी
दिल्ली में भी स्थिति गंभीर बताई जा रही है. नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के पदाधिकारियों का कहना है कि कमर्शियल गैस सिलेंडर लगभग खत्म हो चुके हैं. उनके अनुसार कई रेस्टोरेंट्स के पास सिर्फ 2–3 दिन की गैस बची है. पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) का प्रेशर भी कम महसूस किया जा रहा है. पहले जहां 100% सप्लाई मिलती थी, अब वह लगभग 80% तक रह गई है. अगर सप्लाई नहीं बढ़ी तो कई रेस्टोरेंट्स को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ सकता है.मीडिया रिपोर्ट की मानें तो कई जगहों पर मजबूरी में लकड़ी के चूल्हों पर खाना पकाया जा रहा है. सिलेंडर के लिए रात-रात भर लाइन लगानी पड़ रही है. डिपो में गैस उपलब्ध नहीं है.
सरकार ने उठाए कदम
स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) के तहत एलपीजी की सप्लाई को प्राथमिकता देने का फैसला किया है. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 9 मार्च को आदेश जारी कर कहा कि रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया गया है उपलब्ध गैस की सप्लाई मुख्यतः तीन सरकारी कंपनियों को दी जाएगी और घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी. ये तीन कंपनियां हैं:
- Indian Oil Corporation (IOCL)
- Bharat Petroleum Corporation Limited (BPCL)
- Hindustan Petroleum Corporation Limited (HPCL)
सरकार का कहना है कि देश के घरों में एलपीजी सप्लाई बाधित नहीं होने दी जाएगी.
गैस सप्लाई की नई प्राथमिकताएं
सरकार ने गैस वितरण को चार श्रेणियों में बांटा है:
1. पहली प्राथमिकता
- घरेलू पाइप्ड गैस (PNG)
- वाहनों के लिए CNG
2. दूसरी प्राथमिकता
- खाद (फर्टिलाइजर) उद्योग
- इन्हें औसत खपत का लगभग 70% गैस मिलेगी
3. तीसरी श्रेणी
- चाय उद्योग
- मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर
- राष्ट्रीय गैस ग्रिड से जुड़े उद्योग
4. चौथी श्रेणी
- सिटी गैस नेटवर्क से जुड़े कमर्शियल और औद्योगिक उपभोक्ता
इन सेक्टरों को औसत खपत का लगभग 80% गैस दी जाएगी.
क्या है संकट की वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण गैस और तेल सप्लाई प्रभावित हुई है. भारत में एलपीजी खपत का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर है. आंकड़ों के अनुसार भारत में 33 करोड़ से अधिक एलपीजी कनेक्शन हैं. वर्ष 2024-25 में भारत ने लगभग 31.3 मिलियन टन एलपीजी का उपयोग किया, इसमें से सिर्फ 12.8 मिलियन टन देश में उत्पादन हुआ और बाकी एलपीजी आयात की गई. जानकारी के लिए बता दें कि भारत के एलपीजी आयात का लगभग 85–90% हिस्सा सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों से आता है. खाड़ी क्षेत्र से आने वाली गैस और तेल की आपूर्ति का बड़ा हिस्सा हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होकर गुजरता है. यदि इस क्षेत्र में युद्ध या तनाव बढ़ता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान संकट का संबंध भी इसी स्थिति से जुड़ा हो सकता है.
आम लोगों पर असर
देश के कई राज्यों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं. कई उपभोक्ताओं का कहना है, घर तक सिलेंडर की डिलीवरी में देरी हो रही है. एजेंसियों के फोन नहीं उठ रहे, कुछ जगह 15–20 दिन का इंतजार करने को कहा जा रहा, नतीजा कई परिवारों को मजबूरी में लकड़ी या अन्य ईंधन पर खाना पकाना पड़ रहा है.
सिलेंडर बुकिंग नियम में बदलाव
सरकार ने सिलेंडर बुकिंग के नियम में भी बदलाव किया है. जिसके तहत अब दो सिलेंडर बुकिंग के बीच 25 दिन का अंतर होगा, पहले यह अंतर 21 दिन था. यह कदम मांग और सप्लाई के संतुलन के लिए उठाया गया है. सरकार का कहना है कि रिफाइनरियों को 100% क्षमता पर चलाने और आयात के नए विकल्प तलाशने की कोशिश की जा रही है.अमेरिका और नॉर्वे जैसे देशों से ऊर्जा आयात की संभावनाएं भी देखी जा रही हैं, हालांकि दूरी और लागत के कारण यह दीर्घकालिक समाधान नहीं माना जाता. फिलहाल सरकार का दावा है कि घरेलू उपभोक्ताओं को गैस की सप्लाई प्रभावित नहीं होगी, लेकिन कमर्शियल सेक्टर और उद्योगों पर संकट की आशंका अभी भी बनी हुई है.