NTA का मल्टी-लेयर सिक्योरिटी फेल..? 2024 नीट पेपर लीक मामले की तहकीकात कर रही CBI को सरकार ने फिर सौंपा जांच

NEET Paper Leak : 3 मई 2026 को आयोजित हुई देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG एक बार फिर विवादों में है. परीक्षा के महज कुछ दिनों बाद पेपर लीक की आशंकाओं ने पूरे देश में हड़कंप मचा दिया और फिर 12 मई को केंद्र सरकार ने मामले की जांच Central Bureau of Investigation (CBI) को सौंप दी और परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया.

2024 और 2026 में पैटर्न बदला लेकिन सिस्टम नहीं

2024 में NEET परीक्षा 5 मई को हुई थी और उसी दिन पेपर लीक की खबरें सामने आने लगी थीं. कई जगहों पर कथित रूप से सॉल्वर गैंग सक्रिय पाए गए थे. पटना और हजारीबाग के हॉस्टलों तथा कोचिंग संस्थानों में छात्रों को रातभर कथित तौर पर उत्तर रटवाए जाने की खबरें आई थीं. लेकिन 2026 का मामला थोड़ा अलग बताया जा रहा है. इस बार सीधे प्रश्नपत्र लीक होने के बजाय गेस पेपर मॉडल के जरिए पेपर आउट होने की चर्चा है. जांच एजेंसियों के अनुसार कुछ संदिग्ध नेटवर्क ने ऐसे प्रश्न सेट तैयार किए जिनके लगभग 600 अंक के सवाल असली परीक्षा से मेल खाते बताए जा रहे हैं. यानी पेपर लीक माफिया ने सुरक्षा व्यवस्था को चकमा देने के लिए अपना तरीका बदल लिया है. पहले जहां सीधे प्रश्नपत्र बाहर निकालने की कोशिश होती थी, अब अंदरूनी जानकारी के आधार पर हाई-प्रेडिक्शन पेपर तैयार किए जाने का आरोप सामने आ रहा है.

मल्टी-लेयर सिक्योरिटी पर फिर सवाल

हर वर्ष National Testing Agency (NTA) दावा करती है कि परीक्षा प्रणाली मल्टी लेयर सिक्योरिटी और जीरो लीक पॉलिसी पर आधारित है. इसके बावजूद लगातार दूसरी बार NEET जैसी राष्ट्रीय परीक्षा पर सवाल उठना सिस्टम की विश्वसनीयता पर गंभीर चोट माना जा रहा है. सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि अगर परीक्षा 3 मई को हुई, तो कथित लीक की जानकारी एजेंसियों तक 7 मई के बाद ही क्यों पहुंची? जबकि 2024 में तो परीक्षा वाले दिन ही लीक की खबरें सामने आ गई थीं और कार्रवाई भी शुरू हो गई थी. विशेषज्ञों की मानें तो मामले में देरी से हुई कार्रवाई यह संकेत देती है कि या तो निगरानी तंत्र कमजोर है, या फिर नेटवर्क पहले से अधिक संगठित और तकनीकी रूप से सक्षम हो चुके हैं.

2024 के कथित मास्टरमाइंड की कहानी

2024 के NEET पेपर लीक मामले में बिहार के कथित मास्टरमाइंड संजीव मुखिया का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहा. जांच एजेंसियों के अनुसार उसने प्रश्नपत्र को सॉल्वर गैंग तक पहुंचाने, उत्तर तैयार कराने और छात्रों तक उपलब्ध कराने की पूरी योजना बनाई थी. CBI ने जुलाई 2024 में मामले की जांच अपने हाथ में ली, लेकिन संजीव मुखिया लगभग 11 महीने तक फरार रहा. आखिरकार अप्रैल 2025 में पटना के सगुना मोड़ इलाके से उसकी गिरफ्तारी हुई. जांच एजेंसियों का दावा था कि करोड़ों रुपये लेकर छात्रों को प्रश्नपत्र और उत्तर उपलब्ध कराए गए. प्रति छात्र 40 लाख रुपये तक वसूले जाने के आरोप लगे थे. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. संजीव मुखिया की गिरफ्तारी के बाद CBI को 90 दिनों के भीतर आरोपपत्र दाखिल करना था. लेकिन एजेंसी तय समयसीमा में चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकी. इसका परिणाम यह हुआ कि अगस्त 2025 में उसे जमानत मिल गई. यही वह बिंदु है जहां जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. अगर देश की प्रमुख जांच एजेंसी हाई-प्रोफाइल परीक्षा घोटाले में मुख्य आरोपी के खिलाफ समय पर आरोपपत्र तक दाखिल नहीं कर पाती, तो क्या यह जांच व्यवस्था की विफलता नहीं मानी जानी चाहिए?2024 का मामला अभी भी अदालतों में लंबित है. सुनवाई जारी है, लेकिन अब तक कोई निर्णायक परिणाम सामने नहीं आया. ऐसे में 2026 का नया विवाद यह सवाल और गहरा कर देता है कि क्या देश की जांच और परीक्षा प्रणाली संगठित पेपर लीक नेटवर्क से निपटने में सक्षम है?

करोड़ों का काला कारोबार !

सूत्रों के मुताबिक NEET पेपर लीक नेटवर्क केवल शैक्षणिक अपराध नहीं बल्कि करोड़ों रुपये का संगठित रैकेट बन चुका है. 2024 की तरह इस बार भी छात्रों से 40 से 60 लाख रुपये तक लेने की चर्चा है. इस नेटवर्क में कथित तौर पर सॉल्वर गैंग, कोचिंग कनेक्शन, तकनीकी सहायता और अंदरूनी सूचनाएं शामिल रहती हैं. यही कारण है कि हर बार सुरक्षा व्यवस्था बदलने के बावजूद पेपर लीक माफिया नया रास्ता खोज लेते हैं. NEET केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य का सवाल है. लगातार पेपर लीक की घटनाओं ने मेहनत करने वाले छात्रों का विश्वास तोड़ा है. 2024 में परीक्षा पूरी तरह रद्द नहीं हुई थी, केवल कुछ केंद्रों पर दोबारा परीक्षा कराई गई थी. लेकिन 2026 में पूरी परीक्षा रद्द करने का फैसला यह संकेत देता है कि सरकार इस बार अधिक सख्त रुख दिखाना चाहती है. फिर भी असली चुनौती केवल परीक्षा रद्द करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि पेपर लीक नेटवर्क की जड़ तक पहुंचा जाए, आरोपियों को समयबद्ध सजा मिले और राष्ट्रीय परीक्षाओं की विश्वसनीयता दोबारा स्थापित हो. क्योंकि जब जांच वर्षों तक चलती रहे, मुख्य आरोपी जमानत पर बाहर आ जाएं और हर दो साल में नया पेपर लीक सामने आए, तब सवाल केवल अपराधियों पर नहीं, पूरे सिस्टम पर उठने लगते हैं.

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