Vikramshila Setu collapse News : भागलपुर में गंगा नदी पर बने विक्रमशिला सेतु के एक हिस्से का ढह जाने से स्थानीय लोंगो को काफी दिक्कतों का समाना करना पड़ा रहा है. इस बीच एक नई जानकारी समाने आई है. मीडिया रिपोर्ट की मानें तो विक्रमशिला सेतु के आंशिक रूप से ढहने से पहले पिछले दो वर्षों के दौरान कई निरीक्षण टीमों और अधिकारियों ने इसकी खराब होती स्थिति को लेकर गंभीर चेतावनियाँ दी थीं, लेकिन उन पर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई.
क्या है पूरा मामला
अंग्रेजी समाचार पोर्टल इंडियन एक्सप्रेस के एक रिपोर्ट में अधिकारियों और विभागीय सूत्रों के हवाले से दावा किया गया कि बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड और राज्य के सड़क निर्माण विभाग (RCD) को पिछले कई महीनों से पुल की खतरनाक स्थिति के बारे में लगातार जानकारी दी जा रही थी. मामले को लेकर विभागीय अधिकारियों ने बताया कि अगस्त 2024 से अप्रैल 2026 के बीच कम-से-कम सात आंतरिक पत्राचारों में पुल की जर्जर हालत का उल्लेख किया गया था. वर्ष 2001 में बने इस पुल पर वर्षों से ओवरलोड ट्रकों के दबाव और जोड़ों (Expansion Joints) के पास लगे बेयरिंग कमजोर होने को इसकी खराब स्थिति का मुख्य कारण माना जा रहा है.
जानकारी के लिए बता दें कि अधिकारियों के अनुसार पुल का ढहना दो चरणों में हुआ. 3 मई की रात करीब 11:55 बजे पिलर संख्या 133 में संरचनात्मक विफलता शुरू हुई, जिसके बाद 4 मई की रात 1:07 बजे पुल का एक पूरा स्पैन टूटकर गिर गया. इस घटना के बाद 4.7 किलोमीटर लंबा पुल दो हिस्सों में बंट गया. राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई. इस दुर्घटना के कारण झारखंड और दक्षिण बिहार को उत्तर एवं पूर्वोत्तर बिहार तथा पश्चिम बंगाल से जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग बाधित हो गया है. फिलहाल यातायात को वैकल्पिक मार्गों से डायवर्ट किया गया है, जिससे मुंगेर और खगड़िया के बीच की दूरी 14 किलोमीटर से बढ़कर लगभग 161 किलोमीटर हो गई है.
लगातार मिल रही थीं चेतावनियाँ
रिपोर्टों के अनुसार अगस्त 2024 में निरीक्षण के दौरान छह एक्सपेंशन जॉइंट्स में गैप पाए गए. जिसके बाद फिर जनवरी 2025 में सड़क निर्माण विभाग मुख्यालय को इस संबंध में दोबारा याद दिलाया गया और इसके बाद फिर मार्च 2025 में भागलपुर के जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी ने पुल में बढ़ती दरारों को लेकर राज्य अधिकारियों को आगाह किया. हालांकि उसी महीने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान पटना और BRPNNL की संयुक्त टीम ने निरीक्षण के बाद पुल को सुरक्षित बताया था. अप्रैल 2025 में पुल में चार नई दरारें मिलने की सूचना दी गई और फिर एक साल बाद अप्रैल 2026 में पुल के बेयरिंग्स को नुकसान और संरचना की बिगड़ती हालत पर विस्तृत रिपोर्ट भेजी गई. इन चेतावनियों के बावजूद एक महीने के भीतर पुल का हिस्सा ढह गया.
75 करोड़ रुपये में होगा पुल की मरम्मत
मामले की गंभीरता के चलते हादसे के बाद RCD के NH डिवीजन, भागलपुर के कार्यपालक अभियंता साकेत कुमार रोशन को कथित लापरवाही और कर्तव्य में उदासीनता के आरोप में निलंबित कर दिया गया. निलंबन आदेश में कहा गया कि पुल के रखरखाव की जिम्मेदारी उनके विभाग की थी और प्रथम दृष्टया वे अपने दायित्वों के प्रति लापरवाह पाए गए. फिलहाल सीमा सड़क संगठन, भारतीय सेना, IIT पटना और राज्य एजेंसियों के विशेषज्ञ फिलहाल पुल की आपातकालीन मरम्मत और स्थिरीकरण कार्य में जुटे हैं. अधिकारियों का अनुमान है कि पुल की मरम्मत में करीब तीन महीने का समय लग सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार, हादसे से पहले मरम्मत का अनुमानित खर्च 26 करोड़ रुपये था, लेकिन अब पुल में 13 नए क्रैक पॉइंट मिलने के बाद यह बढ़कर लगभग 75 करोड़ रुपये हो गया है.
बिहार में लगातार हो रहे पुल हादसे
पिछले कुछ वर्षों में बिहार में पुल ढहने की घटनाओं में लगातार वृद्धि हुई है. वर्ष 2022 से 2024 के बीच राज्य में कम-से-कम 15 पुल हादसे सामने आए. इनमें सबसे चर्चित मामला अगुवानी-सुल्तानगंज पुल का है, जो निर्माणाधीन रहते हुए 2022, 2023 और 2024 में तीन बार ढह चुका है. जांच के दौरान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान पटना के विशेषज्ञों ने पुल के डिजाइन में गंभीर खामियों की पहचान की थी. लगातार हो रहे पुल हादसों के बाद बिहार सरकार ने ब्रिज मेंटेनेंस पॉलिसी लागू की, कई इंजीनियरों को निलंबित किया, ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया और पुलों की नियमित सुरक्षा जांच के लिए नए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू किए हैं.