चौतरफा घिरी मनोज बाजपेयी की घूसखोर पंडित…रिलीज से पहले टाइटल को लेकर कानूनी नोटिसों की बौछार, सोशल मीडिया पर भी विरोध

Ghooskhor pandat controversy : फिल्ममेकर नीरज पांडे और अभिनेता मनोज वाजपेई की अपकमिंग नेटफ्लिक्स फिल्म घूसखोर पंडत रिलीज से पहले ही गंभीर कानूनी और सामाजिक विवादों में घिरती नजर आ रही है. हाल ही में मुंबई में आयोजित एक भव्य इवेंट के दौरान जैसे ही फिल्म का टीज़र लॉन्च किया गया, वैसे ही फिल्म के टाइटल को लेकर विरोध शुरू हो गया. देखते ही देखते मामला फिल्म इंडस्ट्री से निकलकर कानूनी और सामाजिक बहस तक पहुंच गया.

फिल्म संस्थाओं ने उठाई टाइटल पर आपत्ति

फिल्म मेकर्स कंबाइन ने नीरज पांडे और ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स को आधिकारिक नोटिस जारी किया है. नोटिस में आरोप लगाया गया है कि फिल्म के टाइटल के लिए इंडस्ट्री के तय नियमों का पालन नहीं किया गया. संस्था का कहना है कि नीरज पांडे इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) के सदस्य हैं और ऐसे में किसी भी फिल्म के टाइटल को रिलीज से पहले पंजीकृत कराना अनिवार्य होता है. नोटिस में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि बिना वैध अनुमति के इस टाइटल का इस्तेमाल जारी रखा गया, तो मेकर्स के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है.

मामला यहीं खत्म नहीं हुआ. मुंबई के वकील आशुतोष दुबे ने भी नेटफ्लिक्स और फिल्म के प्रोड्यूसर्स को एक अलग कानूनी नोटिस भेजा है. नोटिस में आरोप लगाया गया है कि फिल्म का टाइटल पंडित समुदाय की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला और मानहानिकारक है. वकील का तर्क है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी भी समुदाय को अपमानित करने या समाज में नफरत फैलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती. नोटिस में इसे असंवैधानिक बताते हुए कहा गया है कि इस तरह के टाइटल सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकते हैं.

NHRC ने भी लिया संज्ञान

विवाद के बढ़ते दायरे को देखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी मामले में हस्तक्षेप किया है. आयोग ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को नोटिस जारी किया है. NHRC के नोटिस में कहा गया है कि इस तरह के टाइटल और कंटेंट जाति व समुदाय विशेष को निशाना बनाकर उपहास और आलोचना से आगे बढ़ते हुए उन्हें सार्वजनिक रूप से लज्जित करते हैं. आयोग ने इसे एक प्रकार की मनोवैज्ञानिक हिंसा करार दिया है, जिससे सामाजिक वैमनस्य बढ़ने, सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने और मानव जीवन को खतरा पैदा होने की आशंका जताई गई है. आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह सिर्फ किसी एक समुदाय का मामला नहीं, बल्कि पूरे समाज से जुड़ा गंभीर मुद्दा है.

मेकर्स की ओर से अब तक कोई सफाई नहीं

इतने बड़े विवाद कई कानूनी नोटिस और संस्थागत आपत्तियों के बावजूद अब तक न तो नेटफ्लिक्स और न ही नीरज पांडे की प्रोडक्शन टीम की ओर से कोई आधिकारिक बयान या सफाई सामने आई है. इंडस्ट्री से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि विवाद इसी तरह बढ़ता रहा, तो फिल्म के नाम में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

सोशल मीडिया पर भी मचा बवाल

फिल्म का टाइटल घूसखोर पंडत सोशल मीडिया पर भी चर्चा में है. पंडित शब्द आमतौर पर धार्मिक विद्वान या पुजारी के लिए प्रयोग किया जाता है. इसे घूसखोर जैसे नकारात्मक शब्द के साथ जोड़ने पर कई लोगों ने कड़ी आपत्ति जताई है. आलोचकों का कहना है कि यह एक पूरे समुदाय की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश है, जबकि समर्थकों का तर्क है कि फिल्म को देखे बिना निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी. फिलहाल फिल्म की रिलीज को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है. अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि मेकर्स इस विवाद पर,फिल्म के नाम में बदलाव, कानूनी जवाब या आधिकारिक सफाई क्या रुख अपनाते हैं.

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