इश्क़ और बनारस का संगम… दर्शकों को पसंद आएगी धनुष और कृति सेनन की केमेस्ट्री ?

Tere ishq mein: बॉलीवुड एक बार फिर इश्क के रंग में रंग गया है मोहित सूरी की सैयारा के बाद आनंद मिल रहा है जुनून और दर्द को पर्दे पर दिखाने के लिए माहिर है एक ऐसी फिल्म लेकर आए हैं जो प्यार के डिस्ट्रिक्टिव फेस को लोगो के समाने दर्शाती है. रांझणा (2013) से एक अटूट रिश्ता रखते हुए, तेरे इश्क में उस जादू की बात करती है जो मॉडर्न लाइफ के लॉजिक में कहीं खो सा गया है.

क्या दिखाता है आनंद एल राय का नजरिया?

आनंद राय की मूवी में इश्क या तो जहर है या फिर मरहम, इस बार उन्होंने फिर एक सेंसिबल टॉपिक उठाया है, रोमांस की ट्रांसफॉर्मेशन, अल्फा मेल और स्टॉक्स स्टॉकर्स की हिंसा को एक कलात्मक अंदाज में प्रेजेंट कर रहे है.. उन्होंने अपने कैरेक्टर को कंक्रीट के जंगल में अपना इलाका बचाने वाले दबंग एनिमल के रूप में नहीं, बल्कि एक आम इंसान के तौर पर दिखाते हैं – जो चमकते भारत के पीछे की गलियों में रहता है, उसका दर्द, उसका गुस्सा, सच्चा लगता है..

एआर रहमान का संगीत

एआर रहमान के साथ मिलकर, आनंद एल राय ने इच्छा और निराशा की एक अराजक धुन (Chaotic Tune) तैयार की है जो मनोवैज्ञानिक (Psychologist) गहराई और बेलगाम मेलोड्रामा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करती है, हालांकि अक्सर यह दूसरी ओर झुक जाती है.रहमान का संगीत, हमेशा की तरह, आप तक पहुंचने में समय लेता है, लेकिन कहीं बीच में, यह आपको अपने में समा लेता है.

दो अलग लोगों का मिलना

शंकर (धनुष) और मुक्ति (कृति सैनन) रोमांस पर दो ऐसी विश्व-दृष्टियों का टकराव पेश करते हैं जो सदियों से मौजूद हैं. एक नोटरी (प्रकाश राज) के बेटे शंकर, एक छात्र कार्यकर्ता हैं जो अपनी मां की दर्दनाक मृत्यु का दुख लिए मध्यम वर्ग का जीवन जी रहे हैं. वही मुक्ति, मनोविज्ञान (Psychology) की छात्रा, शंकर को अपने सामाजिक हिंसा (Social violence) पर रिसर्च के लिए एक सब्जेक्ट के रूप में देखती है. उसका मानना है कि प्यार गुस्से को ठीक कर सकता है. वह हिंसा को एक अपेंडिक्स की तरह देखती है जिसे बिना नुकसान पहुंचाए हटाया जा सकता है, लेकिन वह उस तूफान को नहीं देख पाती जो किताबों और प्रयोगशालाओं से परे पैदा होता है.

क्या रही मूवी में कमियां?

कहानी और कैरेक्टर की मांग है कि शंकर उत्तर भारत का लड़का हो दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष के रूप में एक दक्षिण भारतीय की कल्पना करना मुश्किल नजर आता है. कॉलेज की हिस्ट्री की तरह एयरफोर्स का हिस्सा भी मुख्य कहानी में आसानी से नहीं मिल पाता है अतरंगी रे को नुकसान हुआ था क्योंकि कहानी का भावनात्मक केंद्र सहजता से नहीं जुड़ा था, यह अंतर को भरा गया है लेकिन दरारे अभी भी बाकी है.

तेरे इश्क में फिलहाल थिएटर्स में चल रही है, यह एक ऐसी फिल्म है जिस पर चर्चा होनी चाहिए…

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