ईरान-इजरायल जंग में अमेरिका की एंट्री, तीन न्यूक्लियर साइट्स पर की बमबारी!

Iran-Israel war : ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव के बीच आखिर वहीं हुआ जिसका ईरान को डर था… दरअसल भारतीय समय अनुसार रविवार सुबह करीब 4:30 बजे अमेरिका ने ईरान के तीन प्रमुख परमाणु ठिकानें फोर्डो, नतांज, और इस्फहान पर हवाई हमले किए. इन ठिकानों को ईरान के परमाणु कार्यक्रम की रीढ़ माना जाता है.

एक दिन पहले अफ्रीका के दो देशों के बीच जारी हिंसा को रोकने का क्रेडिट लेने और नोबेल शांति पुरस्कार की मांग करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प  ने इस हमले  के करीब तीन घंटे बाद  ने देश को संबोधित किया. अपने संबोधन में  उन्होंने कहा कि ईरान की प्रमुख न्यूक्लियर साइट्स को ‘obliterate’ यानी “पूरी तरह तबाह” कर दिया गया है. अपने संबोधन में राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ईरान शांति की दिशा में कदम नहीं उठाया तो और भी बड़े हमले किए जाएंगे.

उधर बाजी अपने हाथ में आते देख इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका के इस कदम का समर्थन किया और अमेरिकी कार्रवाई को इतिहास बदलने वाला हमला बताया. जानकारी के लिए बता दें कि  इजरायल और ईरान के बीच 10 दिनों से तनाव चरम पर है. इजराइली डिफेंस फोर्स (IDF) का दावा है कि उसने अब तक ईरान के 10 न्यूक्लियर साइंटिस्ट्स की हत्या की है और  3 ईरानी सैन्य कमांडरों व 4 सैनिकों को मार गिराया है.

वहीं इस कथित जंग में दोनों देश को हुए नुकसान और मौत का आंकड़ा भी हैरान करने वाला है…अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के अनुसार अब तक ईरान में 657 लोगों की मौत और 2,000 से ज्यादा घायल हो चुके हैं. जबकि ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने 430 नागरिकों की मौत और 3,500 घायल होने की पुष्टि की है. तो इजराइल में अब तक 24 लोगों की मौत और 900 से अधिक घायल की पुष्टि हुई है…

उधर अमेरिकी हमले को लेकर ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन (AEOI) ने हमलों की पुष्टि की और कहा कि ये अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन हैं. संगठन ने IAEA (अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी) पर मिलीभगत और निष्क्रियता का आरोप लगाया. AEOI ने कहा कि  हमले उन साइट्स पर हुए हैं जो IAEA की निगरानी में थीं. इसलिए  IAEA की भी मिलीभगत का चांस है…हालाँकि ईरान ने जोड़ देते हुए कहा  कि इन हमलों के बावजूद वह अपने परमाणु कार्यक्रम को किसी भी कीमत पर नहीं रोकेगा और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कड़ी निंदा की अपील की है.

बता दें कि यह हमला वैश्विक परमाणु सुरक्षा और मध्य पूर्व में स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बन सकता है. अमेरिका की एंट्री से  ईरान और इजरायल के बीच तनाव और बढ़ सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और कूटनीतिक समीकरण प्रभावित हो सकते हैं. भारत समेत कई देशों के लिए इस संकट का असर तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया में बसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है.

वहीं इस मामले में अब  IAEA और संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रिया पर निगाहें टिकी हैं. यह भी देखना अहम होगा कि ईरान इस हमले का जवाब कूटनीति से या प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई…किस रूप में देता है.

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