US Strike Iran Nuclear Sites: पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर है. 22 जून की सुबह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म “ट्रुथ” पर चौंकाने वाली जानकारी साझा की. उन्होंने बताया कि अमेरिका(America ) ने ईरान के तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों—फोर्डो, नतांज और इस्फहान—पर सीधा और सफल सैन्य हमला किया है. यह घटनाक्रम वैश्विक राजनीति और सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है. आइए, समझते हैं अमेरिका के इस सैन्य कार्रवाई के पीछे की पूरी कहानी, तकनीकी पहलू और अमेरिका के इस फैसले के क्या प्रभाव होगा .
America को क्यों कूदना पड़ा जंग में?
शुरुआत में राष्ट्रपति ट्रंप सैन्य हस्तक्षेप के पक्ष में नहीं थे. वे ईरान के साथ न्यूक्लियर डील को लेकर बातचीत को प्राथमिकता दे रहे थे और चाहते थे कि इजराइल भी संयम बरते. लेकिन बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंच रही थी. इसी दौरान इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप को सुझाव दिया कि यदि ईरान पर सैन्य दबाव बनाया जाए तो कूटनीतिक बातचीत में सफलता की संभावना बढ़ सकती है. अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने भी आगाह किया कि केवल इजराइली हमलों से ईरान का परमाणु कार्यक्रम अधिकतम छह महीने के लिए ही रुकेगा. काफी विचार-विमर्श के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर सीधे सैन्य हमले की मंजूरी दे दी.
295 फीट नीचे मौजूद फोर्डो ठिकाने को कैसे किया गया ध्वस्त?
ईरान का फोर्डो न्यूक्लियर फैसिलिटी जमीन से लगभग 295 फीट (करीब 90 मीटर) नीचे स्थित है. ऐसे में इस पर हमला करना तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण था. अमेरिका ने इस मिशन के लिए अपने सबसे उन्नत स्टील्थ बॉम्बर B-2 स्पिरिट का इस्तेमाल किया. यह एक बिना पूंछ वाला रडार से बच निकलने में सक्षम स्टील्थ विमान है. B-2 विमान से गिराए गए बंकर बस्टर बम जमीन के भीतर मौजूद ठिकानों को भी नेस्तनाबूद कर सकते हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, दर्जन भर बंकर बस्टर बम B-2 बॉम्बर्स के जरिए फोर्डो पर गिराए गए.
नतांज और इस्फहान पर हमला कैसे हुआ?
अमेरिका की नेवी पनडुब्बियों से करीब 30 से ज्यादा TLAM (टॉमहॉक लैंड अटैक मिसाइल) दागी गईं. ये मिसाइलें करीब 400 मील दूर से लॉन्च की गईं, और बेहद सटीकता से लक्ष्यों पर वार किया. नतांज न्यूक्लियर फैसिलिटी पर भी B-2 बॉम्बर द्वारा दो बंकर बस्टर बम गिराए गए. इस्फहान में मौजूद यूरेनियम प्रोसेसिंग यूनिट को भी मिसाइल हमलों से निशाना बनाया गया.
इस हमले का असर क्या हो सकता है?
इस सैन्य कार्रवाई ने एक बार फिर मध्य पूर्व को भयानक अस्थिरता की ओर धकेल दिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ईरान का परमाणु कार्यक्रम कुछ समय के लिए रुक सकता है, लेकिन बदले की कार्रवाई या संघर्ष के और गहराने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. अमेरिका का यह फैसला केवल ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने का प्रयास नहीं है, बल्कि पश्चिम एशिया में शक्ति संतुलन को लेकर एक बड़ा संकेत भी है. आने वाले दिनों में यह देखा जाना बाकी है कि ईरान की प्रतिक्रिया क्या होगी, और वैश्विक राजनीति इस टकराव को कैसे संभालती है.