India crude oil supply : मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव (Middle East Tensions) और संभावित युद्ध जैसी स्थिति का वैश्विक तेल और गैस बाजार पर बड़ा असर देखने को मिल रहा है. लगातार ऐसी खबरें सामने आ रही हैं जिनमें कच्चे तेल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है. इसका सीधा प्रभाव भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर पड़ सकता है. इसी बीच भारत के नजरिए से एक अहम अपडेट सामने आया है. भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने मीडिया से बातचीत में कहा है कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजर रहे भारतीय तेल जहाजों को सुरक्षित रास्ता (Safe Passage) दिया जाएगा.
भारत-ईरान संबंध और सुरक्षित मार्ग का फैसला
फतहाली ने कहा कि भारत और ईरान के बीच लंबे समय से दोस्ताना और भरोसेमंद संबंध रहे हैं. कई मौकों पर भारत ने ईरान की मदद की है, इसलिए वर्तमान परिस्थितियों में ईरान का भी दायित्व बनता है कि वह भारत की सहायता करे. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस फैसले का असर कुछ ही घंटों में दिखाई दे सकता है और जो भारतीय जहाज इस समय जलडमरूमध्य क्षेत्र में फंसे हुए हैं, उन्हें जल्द ही सुरक्षित निकलने की अनुमति मिल सकती है. बताया जा रहा है कि करीब 28 भारतीय जहाज इस क्षेत्र में प्रभावित हुए थे.
क्यों अहम है हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक है. वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20% इसी रास्ते से गुजरता है. भारत के कुल तेल आयात का करीब 40% इसी मार्ग से आता है. भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता देश है. ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी तरह की रुकावट भारत की ऊर्जा सुरक्षा, पेट्रोल-डीजल की कीमतों और रसोई गैस की उपलब्धता पर असर डाल सकती है. हाल के दिनों में गैस सिलेंडर की कमी और संभावित मूल्य वृद्धि की चर्चाएँ भी सामने आई थीं.
कूटनीतिक स्तर पर लगातार संपर्क
मीडिया रिपोर्ट की मानें तो स्थिति को संभालने के लिए भारत और ईरान के बीच उच्च स्तर पर लगातार बातचीत जारी है. भारत के विदेश मंत्री ने ईरान के समकक्ष से कई बार फोन पर चर्चा की है उधर प्रधानमंत्री स्तर पर भी दोनों देशों के नेताओं के बीच संवाद हुआ है. इन कूटनीतिक प्रयासों के बाद सुरक्षित मार्ग देने का यह फैसला भारत के लिए राहत भरा माना जा रहा है. मध्य-पूर्व संकट के बीच ईरान का यह कदम भारत की ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है. हालांकि वैश्विक तेल बाजार की स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है और आने वाले दिनों में कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है.