त्रिपक्षीय कूटनीतिक संतुलन की कोशिश में भारत..! पुतिन के रेड कार्पेट स्वागत के बाद अब जेलेंस्की से बातचीत की तैयारी

India Ukraine relations : रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के दो दिवसीय भारत दौरे के बाद अब केंद्र सरकार यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की के संभावित भारत दौरे की तारीख़ों को लेकर सक्रिय हो गई है। मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा कि ज़ेलेंस्की की यह यात्रा जनवरी 2026 में हो सकती है, जिसकी तैयारियां पिछले कई हफ्तों से चुपचाप जारी हैं। विदेश मंत्रालय की ओर से अभी किसी यात्रा की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन शीर्ष स्तर पर तैयारियां तेज हैं और सुरक्षा एजेंसियां भी संभावित कार्यक्रम को लेकर तैयारी ले रही हैं।

कूटनीतिक संतुलन की कोशिश

पुतिन की यात्रा को लेकर पश्चिमी देशों ने जिस तरह की प्रतिक्रिया व्यक्त की है, उसके बाद ज़ेलेंस्की का प्रस्तावित दौरा भारत की संतुलित कूटनीति को और स्पष्ट करता है। केंद्र सरकार रूस और यूक्रेन दोनों से संवाद बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है। मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा कि पुतिन के दौरे से पहले से ही भारत और यूक्रेन के बीच बैक-चैनल बातचीत चल रही थी, जिसमें संभावित एजेंडा और यात्रा के दायरे पर चर्चा हुई।

युद्ध, शांति प्रयास और वैश्विक दबाव भी तय करेंगे समय

ज़ेलेंस्की की यात्रा का अंतिम कार्यक्रम कई अंतरराष्ट्रीय कारकों पर निर्भर करेगा. जिसमें रूस-यूक्रेन युद्ध की स्थिति, संभावित शांति पहल (जिनमें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की पहल भी शामिल), यूक्रेन की आंतरिक राजनीतिक परिस्थिति के साथ यूरोप और अमेरिका की भारत से अपेक्षाओं पर निर्भर करेगा. भारत पर यह दबाव भी बढ़ा है कि वह रूस पर वार्ता का दबाव बनाए, जबकि New Delhi अब तक रणनीतिक स्वायत्तता की नीति पर कायम रहा है।

मौजूदा समीकरणों में भारत की भूमिका अहम

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह यात्रा होती है, तो यह भारत के लिए एक बड़ा कूटनीतिक अवसर होगा. भारत रूस का पारंपरिक साझेदार है वहीं, यूक्रेन के साथ संवाद बनाए रखना यह संदेश देता है कि भारत किसी एक पक्ष का समर्थन नहीं, बल्कि शांति और संवाद का समर्थक है. पुतिन के बाद ज़ेलेंस्की का दौरा भारत को संभावित मध्यस्था की छवि बनाऐगा. हालांकि ज़ेलेंस्की का आधिकारिक एजेंडा सार्वजनिक नहीं है, लेकिन इसमें संभवत युद्ध और शांति के शुरुआती रास्तों पर चर्चा, मानवीय सहायता, ऊर्जा, तकनीक और पुनर्निर्माण सहयोग के साथ द्विपक्षीय व्यापार वार्ता शामिल हो सकते हैं।

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