तीन शर्तों पर रेल नेटवर्क के लिए एडवांस इंजन का ऑफर…पाकिस्तान पर ट्रंप की मेहरबानी या कूछ और ?

Trump Pakistan offer : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के बीच बढ़ती नजदीकियों के संकेत एक बार फिर सामने आए हैं. मीडिया रिपोर्ट की मानें तो ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान के जर्जर रेल नेटवर्क को सुधारने के लिए एडवांस लोकोमोटिव इंजन देने की योजना का ऐलान किया है. हालांकि, यह मदद बिना शर्त नहीं है. सूत्रों के मुताबिक यह प्रस्ताव इसी साल अक्टूबर में पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर की अमेरिका यात्रा के दौरान सामने आया था. इस दौरान ट्रंप ने पाकिस्तान के सामने तीन अहम शर्तें रखीं, जिन पर सहमति के बाद ही इस डील को आगे बढ़ाया जाएगा.

शर्तों के साथ पाकिस्तान को रेल गिफ्ट

बताया जा रहा है कि अमेरिकी प्रशासन पाकिस्तान को आधुनिक लोकोमोटिव इंजन उपलब्ध कराकर उसके पुराने और खस्ताहाल रेलवे सिस्टम को मजबूती देना चाहता है. पाकिस्तान रेलवे लंबे समय से तकनीकी पिछड़ेपन और वित्तीय संकट से जूझ रहा है. ऐसे में यह मदद उसके लिए अहम मानी जा रही है. हालांकि, इस सहयोग के बदले अमेरिका ने रणनीतिक और कारोबारी हितों से जुड़ी तीन शर्तें रखी हैं.

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ट्रंप की तीन शर्तें क्या हैं?

ट्रंप की पहली शर्त है, एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को पाकिस्तान में जल्द से जल्द लाइसेंस दिया जाए. इसके तहत पाकिस्तान के दूर-दराज और पिछड़े इलाकों में हाई-स्पीड सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू की जा सकेगी. ट्रंप की दूसरी शर्त ये है कि अमेजन, गूगल, नेटफ्लिक्स समेत अमेरिकी टेक कंपनियों पर लगाए गए 5 प्रतिशत डिजिटल सर्विस टैक्स को हटाया जाए, ताकि इन कंपनियों के लिए पाकिस्तान में कारोबार करना आसान हो. वहीं तीसरी और सबसे अहम शर्त है बलूचिस्तान में मौजूद रेयर अर्थ मिनरल्स के खनन में अमेरिका की हिस्सेदारी बढ़ाई जाए. इसके साथ ही इन खनिजों की बिक्री में अमेरिका को ज्यादा अधिकार दिए जाएं. रेयर अर्थ मिनरल्स आधुनिक तकनीक, रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के लिए बेहद अहम माने जाते हैं.

क्या है इसके रणनीतिक मायने

विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील सिर्फ आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए अमेरिका दक्षिण एशिया में अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत करना चाहता है. खासकर ऐसे समय में जब चीन पहले से ही पाकिस्तान में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और खनन प्रोजेक्ट्स में सक्रिय है. अब देखना यह होगा कि पाकिस्तान इन शर्तों को किस हद तक स्वीकार करता है और यह प्रस्ताव कब तक औपचारिक समझौते का रूप लेता है.

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