46 मौत..1100 से ज्यादा की गिरफ्तारी..POK में किस बात को लेकर हो रहा विरोध प्रदर्शन..?

PoK Pakistan Protest : अब तक आपने भी पीओके में हो रहे विरोध प्रदर्शन की खबरें सुनी होगी, यह भी मुमकिन है कि आपने इससे जुड़े कुछ वीडियो भी देखा हो.दरअसल इन दिनों पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. बिजली की बढ़ती कीमतें, गेहूं की कमी, आर्थिक संकट और राजनीतिक अधिकारों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब बड़े जन विरोध में बदल गया है. मीडिया रिपोर्ट के रिपोर्टों के मुताबिक प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव भी देखने को मिला है, जिसमें कई आम लोगों की मौत की खबरें सामने आई है. रिपोर्ट के मुताबिक बीते चार दिनों में 1100 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी, जबकि 46 प्रदर्शनकारियों की मौत हुई है.

आखिर क्यों भड़का पीओके में आंदोलन?

टकराव की गंभीरता का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान सरकार ने आंदोलन की अगुवाई कर रहे संगठन जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर कार्रवाई करते हुए प्रतिबंध लगा दिया है. साथ ही आंदोलन से जुड़े प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारी के लिए इनाम की घोषणा भी की है. इलाके में इंटरनेट सेवा पर रोक और सुरक्षा बलों की तैनाती है. तनावपूर्ण हालात को लेकर जानकारों का कहना है कि यह विरोध अचानक शुरू नहीं हुआ. वर्ष 2023 से JAAC के नेतृत्व में स्थानीय व्यापारी और स्थानीय लोग बिजली की महंगी दरों और जरूरी सामानों की कमी के खिलाफ आवाज उठा रहे थे. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जिस क्षेत्र के संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, वहीं के लोगों को उसका फायदा नहीं मिल रहा. उनका दावा है कि पीओके स्थित मंगला हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट जैसे बड़े बिजली उत्पादन केंद्रों के बावजूद स्थानीय लोगों को महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है.

12 आरक्षित सीटों को लेकर विवाद

मीडिया रिपोर्ट की मानें तो शुरुआत में बिजली टैरिफ, महंगाई और गेहूं सब्सिडी जैसे आर्थिक मुद्दे को लेकर आंदोलन हो रहा था, लेकिन धीरे-धीरे इसमें राजनीतिक प्रतिनिधित्व और अधिकारों का मुद्दा भी जुड़ गया. स्थानीय लोगों का आरोप है कि पीओके में फैसले लेने की प्रक्रिया पर इस्लामाबाद का ज्यादा नियंत्रण है जिससे वहां की आम जनता को पर्याप्त राजनीतिक भागीदारी नहीं मिलती. जानकारी के लिए बता दें कि पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कशमीर (पीओके) में विधानसभा की कुल 53 सीटें हैं. हालांकि इनमें से केवल 33 सीटों पर स्थानीय मतदाता सीधे चुनाव करते हैं. बाकी सीटें अलग-अलग वर्गों के लिए आरक्षित हैं और इन्हीं 12 सीटों को लेकर सबसे ज्यादा विवाद है. दरअसल ये 12 सीटें उन लोगों के लिए आरक्षित हैं जो जम्मू-कश्मीर से जाकर पाकिस्तान के दूसरे हिस्से जैसे पंजाब और सिंध में बस गए हैं.

POK के हालात पर क्या है भारत का रुख

पीओके के अलावा पाकिस्तान अधिकृत गिलगिट-बाल्टिस्तान में भी लंबे समय से राजनीतिक अधिकारों, विकास और बुनियादी सुविधाओं को लेकर विरोध होते रहे हैं. भारत लगातार यह कहता रहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा हैं और पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में होने वाली राजनीतिक गतिविधियों को वह अवैध मानता है. भारत ने पीओके और गिलगिट-बाल्टिस्तान में मानवाधिकार और राजनीतिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर चिंता जताई है. पीओके में जारी तनाव को लेकर विदेशों में भी आवाजें उठी हैं. ब्रिटेन में रहने वाले पीओके मूल के लोगों और कुछ सांसदों ने स्थिति पर चिंता जताते हुए संवाद, इंटरनेट बहाली और शांतिपूर्ण समाधान की मांग की है.