इन तीन ‘त्रिमूर्तियों ने हिला दी पूरी दुनिया…! किसका आईडिया था Trump Tariff ?

Trump Tariff : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में 70 से ज्यादा देशों को रेसिप्रोकल टैरिफ (प्रतिक्रिया स्वरूप टैरिफ) से 90 दिनों की छूट दे दी है, जबकि चीन को इस विशेष छूट से बाहर रखा गया है. चीन पर अमेरिकी प्रशासन ने भारी-भरकम 125% का टैरिफ लागू किया है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और व्यापारिक संघर्ष और भी गहरा गया है. ऐसे में यह समझना महत्वपूर्ण हो जाता है कि ट्रंप के इस “टैरिफ बम” के पीछे कौन है और इसके दूरगामी प्रभाव क्या हो सकते हैं.

ट्रंप का अमेरिका फर्स्ट दृष्टिकोण

डोनाल्ड ट्रंप, जो शुरुआत से ही टैरिफ के हिमायती रहे हैं, का मानना है कि सदियों से दुनियाभर के देशों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचाया है. उनका दावा है कि अमेरिका को अब “लूटा” नहीं जाने दिया जाएगा, और उनका इरादा दुनिया के साथ व्यापारिक रिश्तों को फिर से मजबूत करना है. ट्रंप का यह दृष्टिकोण अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक भलाई से जुड़ा हुआ है, जो उनके “अमेरिका फर्स्ट” नीति का हिस्सा है.

चीन का आलोचक : पीटर नैवारो

ट्रंप के टैरिफ बम के आइडिया के प्रमुख आर्किटेक्ट माने जाते हैं पीटर नैवारो, जो आर्थिक मामलों में ट्रंप के शीर्ष सलाहकार हैं. नैवारो, जो चीन के सबसे बड़े आलोचक माने जाते हैं, 2006 में China Wars और 2011 में Death by China जैसी किताबों के लेखक हैं. इन पुस्तकों में उन्होंने चीन की व्यापारिक नीतियों और अमेरिका के लिए उसके खतरों पर गहरी चिंता जताई है.

नैवारो का मानना है कि अमेरिकी व्यापार घाटे को कम करने के लिए संरक्षणवाद (protectionism) और टैरिफ की नीतियां लागू करना जरूरी हैं. वह इसे अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और अमेरिकी नौकरियों के सृजन का एक महत्वपूर्ण उपाय मानते हैं. उनका तर्क है कि जब विदेशी उत्पाद महंगे हो जाएंगे तो अमेरिकी निर्माताओं को प्रतिस्पर्धा का बेहतर मौका मिलेगा.नैवारो ने रेसिप्रोकल टैरिफ (प्रतिक्रिया स्वरूप टैरिफ) का विचार सबसे पहले ट्रंप के सामने रखा था. उनका मानना था कि अन्य देशों द्वारा अमेरिकी वस्तुओं पर लगाए गए टैरिफ के बदले में अमेरिका को भी समान टैरिफ लागू करना चाहिए. उनका यह विचार था कि इससे व्यापार संतुलित होगा और विदेशी देश अपनी नीतियों में बदलाव करने के लिए मजबूर होंगे.

Trump Tariff : स्कॉट बेसेंट और उनकी इकोनॉमी बूस्ट थ्योरी

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट, जो पहले एक हेज फंड मैनेजर थे, ट्रंप की टैरिफ नीति के समर्थक रहे हैं. वह ट्रंप के आर्थिक दृष्टिकोण के साथ सहमत हैं, और उनका मानना है कि टैरिफ से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा. बेसेंट का कहना है कि रेसिप्रोकल टैरिफ से वैश्विक व्यापार में संतुलन आएगा और इससे अमेरिकी इकोनॉमी को बूस्ट मिलेगा, क्योंकि अमेरिकी उत्पादों के लिए विदेशी बाजारों में दरवाजे खुलेंगे.

हालाँकि, जब टैरिफ की घोषणा के बाद शेयर बाजार में गिरावट आई, तब बेसेंट ने जोर देते हुए कहा कि इससे अमेरिका को मंदी का सामना नहीं करना पड़ेगा, बल्कि इसे दीर्घकालिक लाभ मिलेगा. उनका यह भी मानना है कि यह नीति अमेरिकी व्यापार को मजबूत करेगी और समग्र आर्थिक स्थिति में सुधार करेगी.

Trump Tariff : हावर्ड लुटनिक का योगदान

अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हावर्ड लुटनिक, जो पहले एक निवेश बैंकर रहे हैं और ट्रंप के करीबी मित्र हैं, को ट्रंप की टैरिफ नीति का एक प्रमुख समर्थक माना जाता है. लुटनिक, जिन्हें ट्रंप की “मेक अमेरिका ग्रेट अगेन” नीति का दीवाना कहा जाता है, ने टैरिफ को एक “बातचीत का औजार” के रूप में प्रस्तुत किया. उनका मानना था कि टैरिफ के जरिए अमेरिका अन्य देशों को अपने व्यापारिक नीतियों में बदलाव करने के लिए मजबूर कर सकता है.

लुटनिक ने चीन और वियतनाम जैसे देशों पर भारी टैरिफ लगाने की वकालत की थी, क्योंकि उनका मानना था कि इन देशों के साथ अमेरिका का व्यापार असंतुलित है और इसे ठीक करने की जरूरत है. लुटनिक ने इस नीति को अमेरिकी सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक बताया और इसे लागू करने में अहम भूमिका निभाई. उनका कहना था कि यह न केवल व्यापार संतुलन को सुधारने में मदद करेगा, बल्कि अमेरिका को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मजबूत करने का अवसर देगा.

Trump Tariff : चीन के साथ व्यापारिक तनाव

चीन के साथ टैरिफ युद्ध के कारण, दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव अपने चरम पर पहुंच चुका है. अमेरिका ने चीन पर 125% का टैरिफ लगाया है, जिससे चीन के उत्पादों की कीमतें बढ़ गई हैं और दोनों देशों के व्यापार में कमी आई है. चीन ने भी इसके जवाब में अमेरिकी उत्पादों पर अपने टैरिफ लगाए हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में अस्थिरता आ सकती है.

अमेरिकी अर्थव्यवस्था को कितना लाभ पहुंचाएगा ट्रंप की टैरिफ नीति

इस नीति का एक ओर पहलू यह है कि इसके परिणामस्वरूप वैश्विक व्यापार युद्धों में वृद्धि हो सकती है, जिससे अन्य देशों को भी अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है. हालांकि, ट्रंप का मानना है कि इन कदमों से अमेरिका के लिए दीर्घकालिक फायदे होंगे, क्योंकि यह न केवल व्यापार घाटे को कम करेगा, बल्कि अमेरिका की विनिर्माण क्षमता को भी मजबूत करेगा.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति, जिसमें पीटर नैवारो, स्कॉट बेसेंट और हावर्ड लुटनिक जैसे प्रमुख सलाहकारों का योगदान है, अमेरिका की व्यापारिक रणनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है. हालांकि इसके परिणाम समय के साथ ही स्पष्ट होंगे, लेकिन इसका उद्देश्य स्पष्ट है—अमेरिका को वैश्विक व्यापार में एक नई शक्ति के रूप में स्थापित करना और उसके आर्थिक लाभ को सुनिश्चित करना. अब यह देखना होगा कि अन्य देशों का इसके प्रति क्या प्रतिक्रिया होगी और यह नीति अंततः अमेरिकी अर्थव्यवस्था को कितना लाभ पहुंचाती है.

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