ट्रंप के फैसले से अमेरिका पर ‘सॉफ्ट क्लेप्टोक्रेसी’ का आरोप? जानें क्यों उठ रहे सवाल

Foreign Corrupt Practices Act : अमेरिका जिसे दुनिया की सबसे पुरानी डेमोक्रेसी के रूप में जाना जाता है, एक गंभीर सवालों के घेरे में महसूस कर रहा है. कुछ समय पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फॉरेन करप्ट प्रैक्टिस एक्ट (FCPA) को खत्म करने का आदेश दिया, जिस पर व्यापक चर्चा हो रही है. यह एक्ट अमेरिकी अधिकारियों को विदेशी कंपनियों को रिश्वत देने से रोकता था, लेकिन ट्रंप के फैसले ने इसे पूरी तरह से नकार दिया, जिससे देश में बढ़ते भ्रष्टाचार के आरोपों की नई लहर आ गई है. इस फैसले को लेकर अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या अमेरिका अब सॉफ्ट क्लेप्टोक्रेसी(kleptocracy) के रूप में तब्दील हो रहा है, जहां नेताओं और अधिकारियों के भ्रष्टाचार में शामिल होने की संभावना बढ़ रही है.

FCPA की भूमिका और ट्रंप का निर्णय

1977 में अमेरिकी सरकार ने FCPA को लागू किया था, ताकि अमेरिकी कंपनियां अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक लेन-देन में रिश्वत देने से बच सकें. इसके बाद अमेरिकी सरकार ने कई देशों में भ्रष्टाचार के खिलाफ कदम उठाए और वैश्विक स्तर पर पारदर्शिता को बढ़ावा देने की कोशिश की. इस एक्ट के तहत, अमेरिकी कंपनियों पर कड़ी निगरानी रखी जाती थी, और उन्हें किसी भी विदेशी अधिकारी को घूस देने से रोका जाता था.

लेकिन जब डोनाल्ड ट्रंप 2017 में राष्ट्रपति बने, तो उन्होंने अपनी कार्यशैली में विवादित कदम उठाए. उन्होंने कहा कि यह एक्ट अमेरिकी कंपनियों को बाजार में अन्य देशों की कंपनियों से मुकाबला करने में कमजोर बना रहा है, क्योंकि अन्य देशों के अधिकारी घूस लेते हैं, जबकि अमेरिकी कंपनियों को इसके लिए सजा मिलती है. ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान इस एक्ट पर कई बार सवाल उठाए, और अपने दूसरे कार्यकाल में उन्होंने इसे पूरी तरह से हटाने का फैसला किया.

क्या होता है kleptocracy

ट्रंप का यह कदम एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि इसे “क्लेप्टोक्रेसी” (kleptocracy)के रूप में देखा जा रहा है. क्लेप्टोक्रेसी एक राजनीतिक व्यवस्था है, जिसमें सत्ता में बैठे लोग सरकारी पदों और संसाधनों का दुरुपयोग करते हुए अपनी निजी संपत्ति बनाते हैं. यह एक तरह से कानूनी भ्रष्टाचार है, जहां नेता और अधिकारी जनता के धन और संसाधनों का उपयोग अपने फायदे के लिए करते हैं.

अमेरिका ने पहले रूस के व्लादिमीर पुतिन, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन और फिलीपींस के पूर्व राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते को क्लेप्टोक्रेट्स करार दिया था, लेकिन ट्रंप के प्रशासन ने इन देशों से रिश्ते और भी मजबूत किए हैं. सवाल यह उठता है कि क्या ट्रंप ने अमेरिका को भी इसी दिशा में धकेल दिया है, जहां सत्ता में बैठे लोग भ्रष्टाचार को अपने कामकाजी ढांचे का हिस्सा बना रहे हैं.

kleptocracy : भ्रष्टाचार के बढ़ते संकेत

2024 में ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के करप्शन परसेप्शन्स इंडेक्स में अमेरिका का स्कोर 65 था, जो पिछले साल से 4 अंक गिर गया. यह गिरावट दशकों में अमेरिका का सबसे निचला स्कोर है, जो यह दर्शाता है कि अमेरिका में भ्रष्टाचार को लेकर जनता की चिंता बढ़ रही है. ट्रंप के प्रशासन के तहत, कई आरोपों ने उठाया है कि अमेरिका में अब भ्रष्टाचार खुलकर बढ़ रहा है.

अमेरिका में शेल कंपनियां और विदेशी निवेश

अमेरिका में कई शेल कंपनियां सक्रिय हैं, जो बिना असली मालिक का नाम बताए रजिस्टर की जाती हैं. इससे काले धन को सफेद किया जा सकता है, और विदेशी तानाशाहों और भ्रष्ट नेताओं को अपनी संपत्तियां सुरक्षित रखने का मौका मिलता है. इन कंपनियों का एक बड़ा फायदा यह है कि इन्हें ट्रैक करना और नियंत्रण करना बेहद मुश्किल होता है.

इसके अलावा, अमेरिका में बड़े कारोबारी और नेताओं को चुनावों के लिए चंदे मिलते हैं, जिससे उन्हें अपने पॉलिसी फैसलों पर असर डालने का अवसर मिलता है. यह सिस्टम भी धीरे-धीरे क्लेप्टोक्रेसी की ओर इशारा करता है, जहां पैसे और राजनीतिक ताकत के माध्यम से सत्ता के फैसलों को प्रभावित किया जाता है.

ट्रंप का रियल एस्टेट कनेक्शन

जब ट्रंप राष्ट्रपति बने, तो उन्होंने अपने व्यापारिक साम्राज्य को बंद नहीं किया, बल्कि ट्रंप इंटरनेशनल होटल्स और गोल्फ क्लब्स को चालू रखा. इसके बाद, उन्होंने दुनिया भर से डिप्लोमैट्स को अपने होटलों में आमंत्रित करना शुरू किया. यह कदम उनके ऊपर कई सवाल खड़े करता है कि क्या उन्होंने अपनी निजी संपत्ति को अमेरिकी राजनीति से जुड़ी एक रणनीतिक संपत्ति बना दिया.

लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खतरा बन रहा अमेरिका का kleptocracy

इस समय अमेरिका के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वह इस सवाल का सही उत्तर ढूंढे कि क्या वह भ्रष्टाचार और सत्ता में बैठे नेताओं की निजी संपत्ति के निर्माण की व्यवस्था को नियंत्रित करने में सक्षम है या नहीं. ट्रंप के फैसलों ने अमेरिका की छवि को एक बार फिर से विवादों के घेरे में ला दिया है, और यह देखना होगा कि आने वाले समय में अमेरिका को इस पर कैसे प्रतिक्रिया मिलती है.

अंततः, यह भी स्पष्ट होता जा रहा है कि अमेरिका के राजनीतिक और कारोबारी ढांचे में पारदर्शिता की कमी और भ्रष्टाचार से संबंधित चिंताएं बढ़ रही हैं, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खतरे का कारण बन सकती हैं.

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