World News : अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने सीरिया में आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) के ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं. यह कार्रवाई उस हमले के जवाब में की गई है, जिसमें दिसंबर 2025 में सीरिया के पलमायरा इलाके में दो अमेरिकी सैनिकों और एक अमेरिकी नागरिक की मौत हो गई थी. अमेरिकी सेना ने बताया कि यह ऑपरेशन आतंकियों को कड़ा संदेश देने के लिए किया गया है कि अगर वे अमेरिकी सैनिकों को नुकसान पहुंचाएंगे तो उन्हें कहीं भी बख्शा नहीं जाएगा.
क्यों की गई यह सैन्य कार्रवाई?
13 दिसंबर 2025 को सीरिया के पलमायरा शहर में ISIS के एक हमलावर ने अमेरिकी और सीरियाई सुरक्षा बलों पर हमला कर दिया था. इस हमले में दो अमेरिकी सैनिक और एक अमेरिकी नागरिक (अनुवादक) की मौत हो गई थी. इसके बाद अमेरिका ने बदला लेने की घोषणा की थी और अब उसी के तहत यह बड़ा सैन्य अभियान चलाया गया है. इस सैन्य कार्रवाई को अमेरिका ने ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक नाम दिया है. इस ऑपरेशन का आदेश अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दिया. अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) के अनुसार, यह हमला आतंकियों के ठिकानों को पूरी तरह खत्म करने के मकसद से किया गया है.
कैसे हुआ हमला?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक 35 से ज्यादा ISIS ठिकानों को निशाना बनाया गया,90 से ज्यादा आधुनिक मिसाइल और बम गिराए गए,20 से ज्यादा लड़ाकू विमान शामिल रहे. इस हमले में F-15 और A-10 फाइटर जेट,AC-130 गनशिप,MQ-9 ड्रोन और जॉर्डन के F-16 फाइटर जेट का इस्तेमाल किया गया. इन हमलों का मकसद आतंकियों के ठिकानों, हथियारों के भंडार और ट्रेनिंग कैंप को तबाह करना था.
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हमले को लेकर CENTCOM ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि अगर कोई हमारे सैनिकों को नुकसान पहुंचाएगा, तो हम उसे दुनिया के किसी भी कोने में ढूंढकर मारेंगे. वहीं अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि हम न भूलेंगे और न ही पीछे हटेंगे. यह जंग की शुरुआत नहीं है, बल्कि बदले की घोषणा है.
ISIS अब भी सीरिया में सक्रिय
हालांकि ISIS को सीरिया और इराक में बड़ी हार मिल चुकी है, लेकिन अब भी यह संगठन सीरिया के रेगिस्तानी इलाकों,दूर-दराज के क्षेत्रों में छिपकर हमले करता रहता है. अमेरिकी सेना पिछले कई महीनों से ISIS के खिलाफ अभियान चला रही है और दिसंबर के अंत तक 25 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया गया या गिरफ्तार किया गया था. अमेरिका की सेना अभी भी सीरिया में मौजूद है और ISIS के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अभियान ऑपरेशन इनहेरेंट रिजॉल्व के तहत काम कर रही है. हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप पहले भी सीरिया से सेना हटाने की बात कह चुके हैं, लेकिन सुरक्षा हालात को देखते हुए अमेरिकी सेना अब भी वहां तैनात है. सीरिया में किए गए ये हवाई हमले अमेरिका की अब तक की सबसे बड़ी जवाबी कार्रवाई मानी जा रही है. इससे साफ संकेत है कि अमेरिका ISIS के खिलाफ किसी भी हद तक जाने को तैयार है और अपने सैनिकों पर हुए हमले को कभी माफ नहीं करेगा.