West Bengal election results : भाजपा के राजनीतिक इतिहाश में यह पहली बार होगा जब पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार होगी. दरअसल पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर करते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्य में निर्णायक जीत दर्ज की है. इस जीत के साथ ही ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 15 साल लंबे शासन का अंत हो गया. भाजपा की जीत पूरे राज्य में फैली हुई दिखी, जहां उसने उत्तर बंगाल में अपना गढ़ बरकरार रखा, वहीं दक्षिण बंगाल और खासकर प्रेसिडेंसी डिवीजन में भी सेंध लगा दी, जिसे अब तक TMC का मजबूत किला माना जाता था. इस बार TMC के खिलाफ तीन बड़े मुद्दे सामने आए. इसमें भारी एंटी-इंकंबेंसी, हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण और गुंडागर्दी को लेकर नाराजगी शामिल है.
TMC के गढ़ में भाजपा की बड़ी सेंध
दक्षिण बंगाल के 240 सीटों वाले क्षेत्र जिसमें कोलकाता समेत हावड़ा, नदिया और 24 परगना शामिल हैं, में इस बार भाजपा ने अप्रत्याशित प्रदर्शन किया. यह इलाका लंबे समय से सत्ता का केंद्र रहा है, जहां से ज्योति बसु, बुद्धदेव भट्टाचार्य और ममता बनर्जी जैसे मुख्यमंत्री रहे हैं. भाजपा ने इन सभी का फायदा उठाते हुए प्रेसिडेंसी डिवीजन में करीब 27 सीटों पर बढ़त बनाई. कोलकाता की 11 सीटों में से 6 पर भाजपा आगे रही, जबकि 5 सीटें TMC के खाते में जाती दिखीं.
उत्तर बंगाल में भाजपा का मजबूत किला कायम
उत्तर बंगाल की 54 सीटों में भाजपा ने अपना दबदबा बनाए रखा और करीब 27 सीटों पर बढ़त हासिल की. दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी और कूचबिहार जैसे क्षेत्रों में पार्टी का प्रदर्शन मजबूत रहा. यहां भाजपा ने स्थानीय मुद्दों पर फोकस किया. इसमें गोरखालैंड मुद्दे का स्थायी समाधान, चाय बागानों में मजदूरों की समस्याएं और राजबंशी समुदाय को साधने की रणनीति शामिल रहा.
आदिवासी बेल्ट में भाजपा की वापसी
दक्षिण बंगाल के जंगलमहल क्षेत्र (40 सीटें) में भाजपा ने जबरदस्त वापसी की. झारग्राम और पुरुलिया में लगभग सभी सीटों पर भाजपा को बढ़त है. बांकुड़ा और पश्चिम मिदनापुर में भी पार्टी ने मजबूत प्रदर्शन किया है. यह इलाका पहले माओवादी प्रभाव में था और बाद में TMC का गढ़ बना, लेकिन इस बार स्थानीय मुद्दों जैसे आवास, पेयजल और किसानों की समस्याओं ने चुनावी रुख बदल दिया.
80 सीटों पर सिमटती दिख रही है टीएमसी
कुल मिलाकर पश्चिम बंगाल में भाजपा की यह जीत सिर्फ सीटों की नहीं, बल्कि रणनीतिक विस्तार की भी कहानी है. पार्टी ने क्षेत्रवार मुद्दों को समझकर प्रचार किया और TMC के मजबूत गढ़ों में भी सेंध लगाने में सफल रही. पिछले विधानसभा चुनाव से तुलना करने तो 2021 के मुकाबले महज 7% वोट बीजेपी को ज्यादा मिले हैं लेकिन लेकिन सीटों की संख्या में पार्टी को 121 सीटों का इजाफा होता दिख रहा हैं. भाजपा के बेहतरीन प्रदर्शन के पीछे सबसे बड़ा कारण है टीएमसी. दरअसल 2026 के चुनावी नतीजों को देखें तो यह साफ साफ झलक रहा है कि ममता अपना गढ़ बचाने में सफल नहीं हो पाईं. बंगाल के 294 सीटों में जिन 119 सीटों पर टीएमसी पिछले 15 साल से लगातार काबिज थी, उनमें से करीब 58% सीटें भाजपा के खाते में जाता दिख रहा है. यानी कि कुल 69 सीटें बीजेपी ममता से छीनती दिख रही है.