bihar election expenditure : पैसे के बिना कुछ भी कहां होता है…आपने अक्सर ये लाइन सुनी होगी जिसमें काफी सच्चाई भी है. और जब पैसे से ताकत चुनने की बात हो तो हर किसी की कोशिश होती है कि वो इसमें सफल हो जाए. इसी को लेकर यह भी दावा किया जाता रहता है चुनावी राजनीति में पैसे पानी की तरह बहाया जाता है. बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के चुनावी खर्च का अकालन करें तो पता चलता है कि इस खर्च में बीजेपी सबसे आगे है और कांग्रेस ने पूंजी का बड़ा हिस्सा झोंका फिर भी उसे कुछ खास हाथ नहीं लगा. दरअशल, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राजनीतिक दलों के चुनावी खर्च के आंकड़े सामने आने लगे हैं. ज्यादातर दलों ने चुनाव आयोग के समक्ष अपने खर्च का विवरण जमा कर दिया है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, चुनाव प्रचार पर सबसे अधिक खर्च भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने किया है. हालांकि जनता दल (यूनाइटेड) और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की बैलेंस शीट अभी जमा नहीं होने के कारण उनके खर्च के आंकड़े सार्वजनिक नहीं हो सके हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी ने बिहार चुनाव प्रचार पर कुल 146.71 करोड़ रुपये खर्च किए. यह राशि कांग्रेस के खर्च से चार गुना से भी अधिक है. दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस ने अपने कुल जमा कोष का लगभग 28 फीसदी चुनाव प्रचार में खर्च किया, जबकि बीजेपी ने अपनी कुल पूंजी का सिर्फ 2 फीसदी ही चुनावी मुहिम पर लगाया.
ट्रैवल और विज्ञापन पर सबसे ज्यादा खर्च
चुनाव आयोग को दी गई जानकारी के अनुसार, बीजेपी का सबसे अधिक खर्च स्टार प्रचारकों के ट्रैवल, चुनावी रैलियों और मीडिया विज्ञापनों पर हुआ. विज्ञापन मद में सबसे बड़ी राशि 14.27 करोड़ रुपये गूगल इंडिया को दी गई. इसके अलावा पार्टी ने उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने के लिए आर्थिक सहयोग के रूप में 29.71 करोड़ रुपये भी खर्च किए. बीजेपी ने 101 सीटों पर चुनाव लड़ा और एनडीए के बैनर तले उसके 89 विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचे. इस हिसाब से पार्टी ने एक विधायक पर औसतन करीब 1.65 करोड़ रुपये खर्च किए.
कांग्रेस के खर्च करने पर भी प्रदर्शन कमजोर
कांग्रेस ने चुनाव आयोग को दिए गए विवरण में बताया कि उसने बिहार चुनाव अभियान पर 35.07 करोड़ रुपये खर्च किए. इसमें से 12.83 करोड़ रुपये स्टार प्रचारकों की आवाजाही पर और 11.24 करोड़ रुपये सोशल मीडिया कैंपेन पर खर्च हुए. पार्टी ने 61 उम्मीदवार मैदान में उतारे, लेकिन उसे सिर्फ 6 सीटों पर जीत मिली. इस तरह कांग्रेस को एक विधायक हासिल करने के लिए औसतन करीब 5.84 करोड़ रुपये खर्च करने पड़े.
वाम दल और बसपा ने कितना किया है खर्च
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई-एम) को महागठबंधन में चार सीटें मिली थीं, लेकिन जीत सिर्फ एक सीट पर मिली. पार्टी ने चुनाव प्रचार पर 26.75 लाख रुपये खर्च किए. इस हिसाब से सीपीआई(एम) को सबसे सस्ता विधायक मिला. वहीं बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) ने 181 उम्मीदवार उतारे, लेकिन उसे भी सिर्फ एक सीट पर सफलता मिली. पार्टी ने चुनाव प्रचार पर 6.01 करोड़ रुपये खर्च किए, जिससे उसका विधायक सबसे महंगा साबित हुआ.
चुनाव पूर्व खर्च का पूरा अनुमान मुश्किल
विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव की औपचारिक घोषणा से पहले हुए खर्च का सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है. कई दलों ने रैलियां, यात्राएं और संगठनात्मक बैठकों पर भी बड़ी रकम खर्च की, जो आधिकारिक रिपोर्ट में शामिल नहीं हो सकती. कुल मिलाकर, चुनावी खर्च और सीटों की संख्या के बीच सीधा संबंध नहीं दिखता. हालांकि अधिक संसाधनों के इस्तेमाल ने कुछ दलों को संगठनात्मक और प्रचारात्मक बढ़त जरूर दी है.