Bihar Water crisis : आईआईटी पटना और राज्य के जल संसाधन विभाग द्वारा किए गए हालिया सर्वे में बिहार में भूगर्भ जलस्तर के तेजी से गिरने का खुलासा हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक यदि मौजूदा स्थिति जारी रही तो वर्ष 2050 तक बिहार जल संकट वाले राज्यों की श्रेणी में पहुंच सकता है.
भूजल स्तर में बड़ी गिरावट
वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट पर चर्चा के दौरान बिहार विधान परिषद में जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि राज्य में जल प्रबंधन को लेकर दीर्घकालिक और ठोस योजना बनाने की आवश्यकता है तथा भूगर्भ जल के अंधाधुंध दोहन पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए. मंत्री ने बताया कि मानसून पूर्व भूजल स्तर के आकलन में औरंगाबाद, सारण, सीवान, गोपालगंज, पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, खगड़िया, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, पूर्णिया, किशनगंज, अररिया और कटिहार सहित कई जिलों में पिछले दो वर्षों के दौरान भूजल स्तर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है. विभाग इस मामले की विस्तृत जांच कर रहा है और पानी की गुणवत्ता में कमी के कारणों का पता लगाने के लिए एक नए अध्ययन की भी योजना बनाई जा रही है.
घट रही प्रति व्यक्ति जल की उपलब्धता
विजय कुमार चौधरी ने कहा कि राज्य में प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता तेजी से घट रही है और बिहार अब ‘वॉटर स्ट्रेस’ की स्थिति में प्रवेश कर चुका है. उन्होंने दीर्घकालिक जल प्रबंधन, नदी पुनर्जीवन और गंगाजल जैसी योजनाओं पर जोर देते हुए जनभागीदारी की अपील की. मंत्री ने बताया कि कभी बिहार में लगभग 600 नदियां हुआ करती थीं, लेकिन वर्तमान में सरकार को 340 नदियों को चिन्हित कर उनके पुनर्जीवन के लिए विशेष अभियान चलाना पड़ रहा है. नदियों में बढ़ती गाद (सिल्ट) को बड़ी समस्या बताते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति या संस्था मिट्टी भराई के लिए सिल्ट लेना चाहे तो सरकार इसे मुफ्त में उपलब्ध कराएगी. इसके लिए जिलों में डीएम की अध्यक्षता में प्रशासनिक समितियां गठित की गई हैं.
बढ़ते जनसंख्या घनत्व के कारण जल संसाधनों पर दबाव
उन्होंने कहा कि नदियों में सिल्ट जमा होने से उनकी गहराई कम हो जाती है, जिससे जलधारण क्षमता घटती है और बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है. चांदन डैम में यह प्रयोग सफल रहा है और अब इसे पूरे राज्य में लागू करने की तैयारी है. राज्य में बढ़ते जनसंख्या घनत्व के कारण जल संसाधनों पर दबाव भी लगातार बढ़ रहा है. हालांकि सरकार का दावा है कि जल-जीवन-हरियाली मिशन के माध्यम से भूजल स्तर में कुछ सुधार देखने को मिला है और सिंचाई क्षेत्र में भी वृद्धि दर्ज की गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में राज्य को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है.