Bihar Politics : सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई सरकार 24 अप्रैल को अपनी ताकत का परीक्षण करेगी. बिहार विधानसभा का विशेष सत्र इसी दिन सुबह 11 बजे से शुरू होगा, जिसमें मुख्यमंत्री Samrat Chaudhary सदन में विश्वास मत प्रस्ताव पेश कर बहुमत साबित करेंगे. विधानसभा सचिवालय की ओर से इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी गई है. नई सरकार के गठन के बाद बुलाया गया यह सत्र राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है.
विश्वास मत कब और क्यों लाया जाता है?
विश्वास मत (Trust Vote) के जरिए यह तय किया जाता है कि सरकार को सदन में पर्याप्त समर्थन हासिल है या नहीं. आमतौर पर राज्यपाल के निर्देश पर सरकार को तय समयसीमा के भीतर विधानसभा में बहुमत साबित करना होता है. यह स्थिति तब आती है जब नई सरकार का गठन होता है या सरकार के बहुमत पर संदेह उत्पन्न होता है. यदि सरकार बहुमत साबित करने में विफल रहती है, तो उसे इस्तीफा देना पड़ता है.
नीतीश कुमार ने की मुलाकात
विशेष सत्र से पहले राजनीतिक हलचल भी तेज है. पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से उनके आवास पर मुलाकात की. मुलाकात के दौरान की तस्वीरों में सम्राट चौधरी उन्हें प्रणाम करते नजर आए, जबकि नीतीश कुमार उनके कंधे पर हाथ रखे हुए दिखे. इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट के साथ-साथ राजनीतिक संकेतों के रूप में भी देखा जा रहा है.
15 अप्रैल को ली थी शपथ
सम्राट चौधरी ने 15 अप्रैल को बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. उनके साथ जेडीयू कोटे से विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव को उपमुख्यमंत्री बनाया गया. पद संभालने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक स्तर पर सक्रियता दिखाते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बिहार को विकसित राज्य बनाने के लक्ष्य के साथ अनुशासन और संवेदनशीलता से काम किया जाए. अब सभी की नजरें 24 अप्रैल पर टिकी हैं, जब यह साफ हो जाएगा कि नई सरकार को सदन में कितना समर्थन हासिल है.