तेजस्वी यादव के फैसले से बेघर हुआ लालू परिवार… जानें राबड़ी देवी का 10 सर्कुलर रोड बंगला क्यों छिन गया

Bihar Minister New House: बिहार में नई एनडीए सरकार के गठन के बाद जहां प्रशासनिक पुनर्व्यवस्था तेज हो गई है, वहीं अब प्रमुख नेताओं के सरकारी आवासों में भी बड़ा बदलाव शुरू हो गया है. भवन निर्माण विभाग ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का पटना स्थित चर्चित पता 10, सर्कुलर रोड का आवंटन रद्द कर दिया है. इसके स्थान पर उन्हें 39, हार्डिंग रोड का नया बंगला दिया गया है. यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि 10 सर्कुलर रोड में न सिर्फ राबड़ी देवी, बल्कि आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव भी वर्षों से रह रहे हैं.

आरजेडी का भाजपा पर आरोप

राबड़ी देवी का आवास बदलने पर आरजेडी नाराज है. पार्टी प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने आरोप लगाया कि यह बदले की राजनीति है. सरकार में भाजपा का प्रभाव बढ़ा है और उसी का दबाव है कि राबड़ी देवी का आवास बदला गया. आरजेडी का कहना है कि राबड़ी देवी लंबे समय से 10 सर्कुलर रोड में रह रही हैं और पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते वे इस आवास की हकदार थीं. लेकिन लालू परिवार के 10 सर्कुलर रोड से बेघर होने के पीछे की कहानी तेजस्वी यादव के केस से जुड़ी है.

क्या था मामला?

राबड़ी देवी का आवास यदि बतौर पूर्व मुख्यमंत्री उनके नाम पर जारी रहता, तो शायद यह बदलाव नहीं होता. लेकिन 2017–19 में तेजस्वी यादव द्वारा दायर एक याचिका ने पूरा समीकरण बदल दिया. 2017 में एनडीए की सरकार बनने के बाद भवन निर्माण विभाग ने तेजस्वी यादव को 5, देशरत्न मार्ग का बंगला खाली करने का आदेश दिया. यह वही आवास था, जहां वे उपमुख्यमंत्री रहते थे और जिसकी साज-सज्जा पर उन्होंने काफी खर्च कराया था. तेजस्वी इसे नेता प्रतिपक्ष के तौर पर भी रखना चाहते थे, इसलिए वे हाईकोर्ट चले गए.

हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण खुलासा

तत्कालीन चीफ जस्टिस ए. पी. शाही और जस्टिस अंजना मिश्रा की बेंच ने सुनवाई में पाया कि बिहार सरकार ने 2010 में कानून बदलकर सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी बंगला, सुरक्षा, स्टाफ और तमाम सुविधाएं देने की व्यवस्था की थी. इसके तहत राबड़ी देवी, लालू यादव, जीतन राम मांझी, जगन्नाथ मिश्रा और सतीश प्रसाद सिंह जैसे पूर्व मुख्यमंत्रियों को बंगले आवंटित थे. कोर्ट ने इसे असंवैधानिक मानते हुए स्वत: संज्ञान लिया और राज्य सरकार से जवाब मांगा. जिसके बाद 19 फरवरी 2019 का ऐतिहासिक फैसला देते हुए कोर्ट ने आदेश दिया कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को दी गई आजीवन आवास-सुरक्षा की योजना रद्द की जाए और सभी को आवंटित बंगले और सुविधाएं वापस ली जाएं.इस फैसले का सीधा असर राबड़ी देवी पर पड़ा.

क्या होता अगर कोर्ट यह व्यवस्था खत्म न करता?

यदि हाईकोर्ट ने पूर्व सीएमों के लिए दी जाने वाली आजीवन सुविधा को रद्द न किया होता, तो राबड़ी देवी 10 सर्कुलर रोड में बतौर पूर्व मुख्यमंत्री रह सकती थीं. सरकार के पास आवास बदलने का अधिकार सीमित होता और मौजूदा स्थिति पैदा नहीं होती. लेकिन कोर्ट के आदेश के बाद राबड़ी देवी अब सिर्फ नेता प्रतिपक्ष (MLC) के कोटे से आवास पा सकती हैं और इसी आधार पर 39 हार्डिंग रोड आवंटित किया गया है. 10 सर्कुलर रोड सिर्फ एक बंगला नहीं, बल्कि दो दशक से बिहार की राजनीति का केंद्र रहा है. लालू परिवार की हर बड़ी बैठक, महागठबंधन की रणनीति, चुनावी तैयारी सब इसी पते से होती रही हैं. अब इसे खाली कराने का आदेश राजनीतिक हलचल और बढ़ा सकता है.

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