Bihar news : बिहार में बच्चों को बाल श्रम और तस्करी से मुक्त कर सुरक्षित भविष्य देने के लिए राज्य सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है. बिहार सरकार किशोर न्याय अधिनियम, 2015 और मिशन वात्सल्य को जोड़कर एक समग्र एक्शन प्लान तैयार कर रही है, जिसका उद्देश्य केवल बच्चों को छुड़ाना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित वातावरण, शिक्षा और पुनर्वास से जोड़ना है.
व्यापक रेस्क्यू और पुनर्वास योजना
मीडिया रिपोर्ट की मानें तो श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग इस दिशा में तेजी से काम कर रहा है. प्रस्तावित एक्शन प्लान के तहत बचाए गए बच्चों को अस्थायी शेल्टर होम में रखा जाएगा, जहां उन्हें सुरक्षा, देखभाल और काउंसलिंग दी जाएगी. इसके बाद उन्हें शिक्षा और कौशल विकास से जोड़ा जाएगा, ताकि वे दोबारा शोषण के चक्र में न फंसें.
राज्य से बाहर भी चलेगा अभियान
अब तक रेस्क्यू ऑपरेशन मुख्य रूप से राज्य की सीमाओं तक सीमित थे, लेकिन नए प्लान में दूसरे राज्यों में तस्करी कर ले जाए गए बच्चों को भी वापस लाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. इसके लिए मौजूदा नियमों में संशोधन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है. इस योजना को तैयार करने में विशेषज्ञों और आम लोगों के सुझावों को शामिल किया जाएगा. सरकार का लक्ष्य एक मजबूत और प्रभावी रणनीति बनाना है, जिससे बाल तस्करी के नेटवर्क पर स्थायी रोक लगाई जा सके.
कौशल विकास पर जोर
रेस्क्यू किए गए बच्चों को केवल घर भेजने के बजाय उन्हें आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया जाएगा. शेल्टर होम में रहने वाले किशोरों को वोकेशनल ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वे भविष्य में सम्मानजनक रोजगार हासिल कर सकें. सरकार ने गया, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, सीतामढ़ी और पूर्णिया जैसे जिलों को बाल श्रम के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र (रेड जोन) के रूप में चिन्हित किया है. इन इलाकों से मुक्त कराए गए बच्चों को स्कूलों से जोड़ने की पहल पहले ही शुरू की जा चुकी है. अब इसी मॉडल को राज्य के बाहर से छुड़ाकर लाए गए बच्चों पर भी लागू किया जाएगा, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो और वे शिक्षा के माध्यम से मुख्यधारा में लौट सकें. सरकार का मानना है कि यह नया एक्शन प्लान बच्चों के अधिकारों की रक्षा और बिहार के भविष्य को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा.