bihar news today : बिहार राज्य सवर्ण आयोग ने राज्य में उच्च जातियों के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के सभी पात्र लोगों को शत-प्रतिशत प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश जिलाधिकारियों को दिया है. साथ ही, इस प्रक्रिया में आने वाली कठिनाइयों के समाधान के लिए सभी प्रमंडलीय आयुक्तों को आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है.
EWS प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया की समीक्षा
शुक्रवार को नेहरू मार्ग (बेली रोड) स्थित आयोग कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता आयोग के अध्यक्ष डॉ. महाचंद्र प्रसाद सिंह ने की. बैठक में ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया की समीक्षा की गई. इस दौरान सामने आया कि ईडब्ल्यूएस नियमावली में कुछ त्रुटियां हैं, जिनमें सुधार के लिए सामान्य प्रशासन विभाग तथा राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से समन्वय की आवश्यकता बताई गई.आयोग ने सभी जिलों से अब तक जारी किए गए ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्रों की संख्या, अस्वीकृत आवेदनों तथा लंबित मामलों का विस्तृत ब्योरा मांगा है.
छात्र-छात्राओं के लिए नि:शुल्क कोचिंग, छात्रावास की व्यवस्था
बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉ. सिंह ने बताया कि पिछले सात महीनों में आयोग द्वारा किए गए कार्यों की समीक्षा की गई है. सभी नौ प्रमंडलों से प्राप्त सुझावों और समस्याओं पर चर्चा हुई. आयोग ने राज्य सरकार से मांग की है कि उच्च जातियों के गरीब भूमिहीन परिवारों को घर बनाने के लिए पांच डिसमिल बासगीत भूमि उपलब्ध कराई जाए. इसके अलावा छात्र-छात्राओं के लिए नि:शुल्क कोचिंग, छात्रावास की व्यवस्था तथा प्रतियोगी परीक्षाओं में आयु सीमा बढ़ाकर पुरुषों के लिए 40 वर्ष और महिलाओं के लिए 45 वर्ष करने का अनुरोध भी किया गया है.
जिला प्रशासन को आवश्यक निर्देश
आयोग के अनुसार, सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की आबादी 25.09 प्रतिशत है, जबकि इस वर्ग में 10 हजार रुपये मासिक आय वाले लोगों की संख्या 49.07 प्रतिशत बताई गई है. आयोग का मानना है कि इस वर्ग को आवास, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में सरकारी सहयोग की आवश्यकता है. उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने आर्थिक आधार पर आरक्षण की व्यवस्था के तहत अपर कास्ट के गरीब वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया है, जिसे ईडब्ल्यूएस के नाम से जाना जाता है. हाल के दिनों में ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र प्राप्त करने में आ रही कठिनाइयों की शिकायतें मिल रही थीं, जिसके मद्देनजर आयोग ने जिला प्रशासन को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं.