लोकसभा में अपने ही सांसद के पीछे पड़ी JDU..? गिरिधारी यादव के सदन की सदस्यता से हटाने की क्यों हो रही मांग

Bihar politics : जनता दल (यूनाइटेड) ने अपनी पार्टी के सांसद गिरिधारी यादव के खिलाफ कड़ा कदम उठाते हुए उनकी लोकसभा सदस्यता रद्द करने की मांग की है. पार्टी ने इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष Om Birla को पत्र लिखा है. पार्टी का आरोप है कि गिरिधारी यादव ने लगातार पार्टी विरोधी गतिविधियों में हिस्सा लिया है. हालांकि लोकसभा स्पीकर को नोटिस दिए जाने के बावजूद उनकी सांसदी पर खतरा टलता नजर आ रहा है. उनकी सदस्यता रद्द होने की संभावना बेहद कम है, क्योंकि संविधान के दलबदल विरोधी कानून के तहत यह मामला सीधे पार्टी के निर्णय पर नहीं चल सकता.

क्या है मामला

जेडीयू नेता और केंद्रीय मंत्री Rajiv Ranjan Singh (ललन सिंह) ने कहा कि सुपौल के सांसद Dileshwar Kamat ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर यादव की सदस्यता समाप्त करने की मांग की है. ललन सिंह ने कहा कि गिरिधारी यादव जो कुछ हो रहा है उसके लिए खुद जिम्मेदार हैं. वे लंबे समय से पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं. हालांकि, गिरिधारी यादव ने इस मामले में कहा कि उन्हें अब तक न तो पार्टी और न ही लोकसभा सचिवालय से कोई आधिकारिक सूचना मिली है. उन्होंने कहा कि जब मुझे आधिकारिक तौर पर कोई सूचना मिलेगी, तभी मैं इस पर प्रतिक्रिया दूंगा.

बेटे के लिए प्रचार बना विवाद की वजह

विवाद तब बढ़ा जब गिरिधारी यादव ने अपने बेटे चाणक्य प्रकाश रंजन के लिए चुनाव प्रचार किया, जो 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में Rashtriya Janata Dal (राजद) के टिकट पर चुनाव लड़े थे. उन्होंने बांका जिले के बेलहर सीट से जेडीयू के उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन करीब 37,000 वोटों से हार गए.

SIR मुद्दे पर भी पार्टी लाइन से अलग बयान

गिरिधारी यादव ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के मुद्दे पर भी पार्टी की आधिकारिक लाइन के खिलाफ बयान दिया था. जेडीयू जहां इस प्रक्रिया का समर्थन कर रही थी, वहीं यादव ने इसे लेकर सवाल उठाए थे. उन्होंने कहा था कि उन्हें बूथ लेवल अधिकारी (BLO) तक पहुंचने में 10 दिन लग गए और चुनाव आयोग बिहार की भौगोलिक परिस्थितियों से पूरी तरह अवगत नहीं है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि कई जगह लोगों से दस्तावेज़ के नाम पर रिश्वत मांगी जा रही है.

पहले भी दे चुके हैं विवादित बयान

दिसंबर 2023 में भी गिरिधारी यादव चर्चा में आए थे, जब उन्होंने लोकसभा की ऑनलाइन प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे. उन्होंने कहा था कि उन्हें संसद की वेबसाइट पर लॉगिन करने के लिए अपना पासवर्ड स्टाफ के साथ साझा करना पड़ता है. साथ ही उन्होंने संसद में प्रश्न पूछने के लिए ऑनलाइन के साथ-साथ ऑफलाइन व्यवस्था की भी मांग की थी.

गिरिधारी यादव का राजनीतिक सफर

65 वर्षीय गिरिधारी यादव चार बार बांका से सांसद रह चुके हैं. उन्होंने 1996 में पहली बार जनता दल के टिकट पर चुनाव जीता था. इसके बाद 2004 में राजद के टिकट पर भी जीत हासिल की. 2019 और 2024 में वे जेडीयू के टिकट पर लोकसभा पहुंचे. वे 2010 और 2015 में बेलहर विधानसभा सीट से विधायक भी रह चुके हैं. लोकसभा में 12 सांसदों के साथ जेडीयू, National Democratic Alliance (एनडीए) की दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी है.

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