Bihar Politics : बिहार विधानमंडल के बजट सत्र के चौथे दिन राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान सदन में सीएम नीतीश कुमार और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के बीच नोक झोंक देखने को मिला. हालांकि इस दौरान दोनों नेताओं ने एक दूसरे पर आरोप भी लगाया. बिहार विधानसभा में जब इतना कूछ हो रहा था तो दूसरी तरफ चुनावी प्रक्रिया को लेकर प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा रही थी. दरअसल,बिहार की राजनीति कब किस ओर करवट ले ये कहना थोड़ा मुश्किल होता है, और एक बार फिर से यह एक अहम मोड़ पर खड़ी दिख रही है.
जहां एक ओर चुनावी प्रक्रिया को लेकर प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, तो दूसरी ओर विधानसभा के भीतर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सत्ताधारी एनडीए पर धनबल के व्यापक इस्तेमाल का गंभीर आरोप लगाया है. इसके अलावा नीतीश कुमार ने भी तेजस्वी यादव पर विधायकों के खरीद फरोख्त का आरोप लगाया है. इन घटनाक्रमों ने राजनीतिक गलियारों में यह बहस तेज कर दी है कि क्या बिहार में चुनावी नतीजों को प्रभावित करने के लिए पैसों का खेल खेला गया !
सुप्रीम कोर्ट में जन सुराज की चुनौती
प्रशांत किशोर के नेतृत्व वाली जन सुराज पार्टी ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को रद्द करने और नए सिरे से निष्पक्ष चुनाव कराने की मांग की है. इस याचिका पर सीजेआई सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ सुनवाई करने वाली है. याचिका का मुख्य आधार यह आरोप है कि चुनाव के दौरान मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट (MCC) लागू रहते हुए राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत बड़ी संख्या में महिलाओं के खातों में 10-10 हजार रुपये की राशि ट्रांसफर की. जन सुराज का दावा है कि चुनाव के दौरान 25 से 35 लाख महिला मतदाताओं को यह राशि दी गई और मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश किया गया. पार्टी का तर्क है कि इस तरह की योजनाएं चुनावी निष्पक्षता के मूल सिद्धांतों के खिलाफ हैं और इससे सत्ता पक्ष को अनुचित लाभ मिलता है. याचिका में चुनाव आयोग से भी स्पष्ट और सख्त दिशा-निर्देश तय करने की मांग की गई है, ताकि चुनाव से ठीक पहले घोषित या लागू की जाने वाली योजनाओं के जरिए मतदाताओं को प्रभावित करने पर रोक लगाई जा सके. जन सुराज ने याचिका में कहा कि चुनाव के 6 महीने पहले से योजनाओं के घोषणा और लागू करने पर रोक लगे.
विधानसभा के भीतर तेजस्वी यादव का हमला
दूसरी ओर बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने एनडीए सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें चुनाव में हराने के लिए सत्ताधारी गठबंधन ने करीब 40,000 करोड़ रुपये खर्च किए. तेजस्वी यादव ने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी राशि कहां से आई और किन मदों में खर्च की गई, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. तेजस्वी का यह बयान केवल राजनीतिक आरोप नहीं, बल्कि चुनावी पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है. हालांकि एनडीए की ओर से इन आरोपों पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है और इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि भी फिलहाल संभव नहीं हो सकी है, लेकिन यह मुद्दा सदन और सियासी बहस के केंद्र में आ चुका है.
नीतीश ने तेजस्वी पर लगाया आरोप
वहीं बजट सत्र के चौथे दिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिला. राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान नीतीश कुमार ने जहां अपनी सरकार की विकास यात्रा का बखान किया और पिछली सरकारों की आलोचना की. इस दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तेजस्वी यादव पर आरोप लगाते हुए पूछा कि छह आदमी(विधायकों) को खींचने के लिए किसने कितना पैसा दिया था.