Bihar bridges : ग्रामीण कार्य विभाग ने आगामी मानसून और संभावित बाढ़ को देखते हुए राज्यभर में ग्रामीण सड़कों पर बने करीब 45 हजार पुल-पुलियों की विशेष जांच कराने का निर्णय लिया है. विभाग ने सभी कार्यपालक अभियंताओं को निर्देश दिया है कि वे मानसून शुरू होने से पहले पुल-पुलियों की स्थिति का निरीक्षण कर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करें.
विभाग की ओर से तैयार कार्ययोजना के तहत पुलों के गर्डर, स्लैब, पिलर, ज्वाइंट तथा जल निकासी व्यवस्था की गहन जांच की जाएगी. अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि बरसात के दौरान पुलों के आसपास जलजमाव की स्थिति उत्पन्न न हो और पानी की निकासी निर्बाध रूप से होती रहे. जिन स्थानों पर अवरोध या क्षति की आशंका होगी, वहां तत्काल सफाई और मरम्मत कार्य कराया जाएगा.
एक महीने के भीतर रिपोर्ट सबमिट करने का आदेश
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, बारिश के मौसम में कई क्षेत्रों में पुल-पुलियों के ऊपर से पानी बहने की स्थिति बन जाती है, जिससे स्थानीय लोगों को आवागमन में परेशानी होती है और सरकारी संपत्ति को भी नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है. इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार विशेष सतर्कता बरती जा रही है. सभी अभियंताओं को निर्देश दिया गया है कि निरीक्षण और मरम्मत से संबंधित रिपोर्ट अगले एक महीने के भीतर विभागीय पोर्टल पर अपलोड करें, ताकि मानसून से पहले सभी पुल-पुलियों की स्थिति का आकलन किया जा सके.
विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक
ग्रामीण कार्य विभाग के मंत्री सुनील कुमार ने भी विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में मानसून पूर्व सभी आवश्यक एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने विशेष रूप से उत्तर बिहार के जिलों में अतिरिक्त निगरानी रखने को कहा है, जहां बाढ़ की आशंका अधिक रहती है और ग्रामीण पुल-पुलियों की संख्या भी ज्यादा है.अधिकारियों के मुताबिक, हाल के वर्षों में जिन कंपनियों ने पुलों का निर्माण किया है, उन्हें ही संबंधित पुलों की साफ-सफाई और रखरखाव का जिम्मा दिया जाएगा. वहीं पुराने पुल-पुलियों की देखरेख स्थानीय कार्यपालक अभियंता अपने स्तर पर कराएंगे. जहां मरम्मत की जरूरत होगी, वहां तत्काल कार्रवाई की जाएगी.
1.19 लाख किलोमीटर ग्रामीण सड़क नेटवर्क
गौरतलब है कि बिहार में लगभग 1.19 लाख किलोमीटर ग्रामीण सड़क नेटवर्क है, जिन पर आवश्यकता के अनुसार बड़ी संख्या में पुल-पुलियों का निर्माण किया गया है. विभाग का कहना है कि वर्तमान में बनाए जा रहे नए पुलों की चौड़ाई सात मीटर रखी जा रही है, ताकि भविष्य में यातायात और जल निकासी की समस्याओं को कम किया जा सके.