क्या है भारत का मिशन दिव्यास्त्र..? एक क्लिक पर चीन-पाकिस्तान का हर कोना

What Is Mission Divyastra : भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए मिशन दिव्यास्त्र के तहत आधुनिक अग्नि-5 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है. यह परीक्षण ओडिशा स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित यह मिसाइल अत्याधुनिक MIRV (मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल) तकनीक से लैस है, जिसने भारत को दुनिया के उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल कर दिया है जिनके पास एक ही मिसाइल से कई लक्ष्यों को निशाना बनाने की क्षमता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफलता पर DRDO के वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए इसे आत्मनिर्भर भारत और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा कदम बताया. इस मिशन की खास बात यह भी रही कि इसमें महिला वैज्ञानिकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही.

क्या है MIRV तकनीक?

MIRV यानी मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल ऐसी आधुनिक तकनीक है, जिसमें एक ही मिसाइल कई परमाणु या पारंपरिक वारहेड लेकर अलग-अलग लक्ष्यों पर एक साथ हमला कर सकती है. इसका मतलब है कि एक मिसाइल से कई शहरों, सैन्य ठिकानों या रणनीतिक केंद्रों को निशाना बनाया जा सकता है. रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक किसी भी दुश्मन देश की मिसाइल रक्षा प्रणाली को चुनौती देने की क्षमता रखती है क्योंकि एक साथ कई दिशाओं में वारहेड भेजे जा सकते हैं.

अग्नि-5 की ताकत

अग्नि-5 भारत की सबसे आधुनिक इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) श्रेणी की मिसाइलों में गिनी जाती है. इसकी प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • रेंज: लगभग 5,000 से 7,000 किलोमीटर
  • गति: ध्वनि की गति से लगभग 24 गुना तेज (मैक 24)
  • क्षमता: एक साथ 3 से 6 अलग-अलग लक्ष्यों पर हमला
  • लॉन्च सिस्टम: रोड-मोबाइल, यानी कहीं से भी लॉन्च करने की क्षमता
  • उपयोग: परमाणु और पारंपरिक दोनों प्रकार के वारहेड ले जाने में सक्षम

विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी बढ़ी हुई क्षमता के कारण अब चीन और पाकिस्तान का लगभग पूरा क्षेत्र भारत की रणनीतिक पहुंच में आ चुका है.

भारत की सेकंड स्ट्राइक क्षमता को मजबूती

रक्षा विश्लेषकों के अनुसार अग्नि-5 का यह नया संस्करण भारत की ‘सेकंड स्ट्राइक’ क्षमता को और मजबूत करता है. इसका अर्थ है कि यदि कोई देश भारत पर परमाणु हमला करता है, तो भारत जवाबी कार्रवाई में दुश्मन को भारी नुकसान पहुंचाने में सक्षम होगा. यह क्षमता किसी भी परमाणु शक्ति संपन्न देश के लिए रणनीतिक संतुलन बनाए रखने में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है.

दुनिया के खास देशों की सूची में भारत

MIRV तकनीक के सफल परीक्षण के बाद भारत अब अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है. यह उपलब्धि भारतीय रक्षा तकनीक और स्वदेशी सैन्य विकास के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है. रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह परीक्षण केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की सामरिक शक्ति और वैश्विक स्तर पर उसकी बढ़ती सैन्य क्षमता का भी संकेत है.

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम

सरकार ने इस उपलब्धि को आत्मनिर्भर भारत अभियान की बड़ी सफलता बताया है. DRDO के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित यह तकनीक भारत को रक्षा क्षेत्र में विदेशी निर्भरता कम करने और स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में नई मजबूती देती है. विशेषज्ञों के मुताबिक अग्नि-5 का नया MIRV संस्करण आने वाले वर्षों में भारत की सामरिक ताकत को और मजबूत करेगा तथा एशिया में शक्ति संतुलन पर भी बड़ा प्रभाव डालेगा.

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