Nitish Kumar : बिहार की राजनीति में एक आधिकारिक पत्र को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. मुख्यमंत्री Nitish Kumar के संभावित इस्तीफे से पहले ही राज्य के गृह विभाग द्वारा जारी एक पत्र ने जनता दल (यूनाइटेड) यानी जेडीयू नेताओं में नाराजगी पैदा कर दी है.
क्या है पूरा मामला?
30 मार्च को राज्य सरकार के विशेष सचिव के. सुहिता अनुपम द्वारा पुलिस महानिदेशक Vinay Kumar को भेजे गए पत्र में कहा गया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो चुके हैं और शपथ लेने से पहले वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए उनकी सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ाकर Z-प्लस श्रेणी में करने का निर्णय लिया गया है.
जेडीयू में नाराज़गी क्यों?
इस पत्र को लेकर जेडीयू नेताओं में असंतोष है. उनका कहना है कि किसी भी सरकारी दस्तावेज़ में मुख्यमंत्री के इस्तीफे के समय का अनुमान लगाना उचित नहीं है. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि यह प्रक्रिया उनके इस्तीफे के बाद ही पूरी की जानी चाहिए थी. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने सवाल उठाया कि सरकारी पत्र में मुख्यमंत्री के इस्तीफे का समय कैसे तय किया जा सकता है? यह जल्दबाजी क्यों दिखाई गई? गौरतलब है कि गृह विभाग वर्तमान में उपमुख्यमंत्री Samrat Choudhary के पास है, जो भाजपा से हैं और नीतीश कुमार के संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखे जा रहे हैं. इस वजह से भी यह मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो गया है. हालांकि, इस विवाद पर भारतीय जनता पार्टी ने अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है.
नीतीश कुमार 30 मार्च को विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे चुके हैं, लेकिन वे फिलहाल मुख्यमंत्री पद पर बने हुए हैं. माना जा रहा है कि वे 10 अप्रैल को राज्यसभा की शपथ लेने के बाद ही इस्तीफा देंगे. इसके अलावा, उन्होंने खरमास (15 अप्रैल तक) के बाद ही नई सरकार बनने का संकेत दिया है. संविधान के अनुसार, कोई भी व्यक्ति बिना विधायक या विधान परिषद सदस्य बने अधिकतम छह महीने तक मुख्यमंत्री पद पर रह सकता है.