Nitish kumar news : राजनीति में कब क्या हो जाए..कुछ नहीं कहा जा सकता है. जैसे नीतीश कुमार को देख लिजिए…कब क्या फैसले ले लें कोई ठीक नहीं. दरअसल बिहार की राजनीति (Bihar Politics) हमेशा से जीवंत और सक्रिय राजनीतिक प्रयोगशालाओं में गिनी जाती रही है. आज़ादी के आंदोलन से लेकर JP Movement और मंडल राजनीति तक, बिहार ने राष्ट्रीय राजनीति को दिशा देने में अहम भूमिका निभाई है. यहां की राजनीतिक चेतना गहरी और व्यापक मानी जाती है. 1974 के जेपी आंदोलन ने पूरे देश में बदलाव की लहर पैदा की, जिसे दूसरी आज़ादी की लड़ाई भी कहा गया. इसके बाद 1990 के दशक में Lalu Prasad Yadav के नेतृत्व में सामाजिक न्याय की राजनीति ने जोर पकड़ा. मुस्लिम-यादव (MY) समीकरण के आधार पर उन्होंने एक मजबूत वोट बैंक तैयार किया और करीब 15 वर्षों तक सत्ता में बने रहे. हालांकि इस दौरान शासन और कानून-व्यवस्था को लेकर कई सवाल भी उठे.
राजनीतिक हलकों में चर्चा
साल 2005 में Nitish Kumar के सत्ता में आने के बाद बिहार की राजनीति का नैरेटिव बदला. विकास, सुशासन, सड़क, बिजली, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दे केंद्र में आए. 2005 और 2010 के विधानसभा चुनावों में यह बदलाव साफ तौर पर दिखा. लेकिन समय के साथ राजनीतिक समीकरण बदलते गए और नीतीश कुमार की बार-बार गठबंधन बदलने की रणनीति ने उन्हें एक अप्रत्याशित नेता के रूप में स्थापित कर दिया. कभी बीजेपी तो कभी आरजेडी के साथ जाने के उनके फैसलों ने राजनीतिक हलकों में लगातार चर्चा बनाए रखी.
राज्यसभा के लिए निर्वाचित
अब एक बार फिर Nitish Kumar सुर्खियों में हैं. 16 मार्च 2026 को वे राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं. वर्तमान में वे बिहार विधान परिषद के सदस्य भी हैं. नियमों के अनुसार उन्हें 30 मार्च 2026 तक किसी एक सदन की सदस्यता चुननी होगी. यहीं से राजनीतिक अटकलों का दौर शुरू हो गया है. सवाल उठ रहा है कि क्या वे मुख्यमंत्री पद छोड़कर राष्ट्रीय राजनीति की ओर कदम बढ़ाएंगे? तकनीकी रूप से वे राज्यसभा सदस्य रहते हुए कुछ समय तक मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं, लेकिन नैतिक और राजनीतिक दबाव इस फैसले को जटिल बना सकते हैं.
डेडलाइन पर टिकी है नजर
विपक्ष ने उनके हालिया बयानों, उम्र और निर्णय क्षमता को लेकर सवाल उठाए हैं. वहीं कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह विपक्ष की रणनीति भी हो सकती है, क्योंकि अतीत में उनके अप्रत्याशित फैसलों ने कई बार राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं. 2005 से लगातार बिहार के मुख्यमंत्री रहे Nitish Kumar देश के सबसे लंबे कार्यकाल वाले मुख्यमंत्रियों में शामिल हैं. उन्होंने कई बार कहा है कि उनका मन हमेशा बिहार में ही रहता है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियां उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर नए सवाल खड़े कर रही हैं. अब सबकी नजर 30 मार्च की डेडलाइन पर टिकी है. क्या यह उनके राजनीतिक जीवन का नया अध्याय होगा या फिर एक और रणनीतिक मोड़, यह आने वाला समय ही तय करेगा.