Bihar ntpc project : बिहार अब केवल कृषि आधारित राज्य की पहचान तक सीमित नहीं रहना चाहता बल्कि राज्य तेजी से ऊर्जा और औद्योगिक विकास की दिशा में कदम बढ़ा रहा है. इसी कड़ी में सरकारी बिजली कंपनी NTPC Limited ने बिहार के बांका जिले में 2.8 गीगावाट क्षमता वाला विशाल न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी है. इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब ₹56,000 करोड़ बताई जा रही है. यदि यह योजना सफल होती है, तो यह बिहार के इतिहास की सबसे बड़ी ऊर्जा एवं औद्योगिक परियोजनाओं में शामिल होगी. साथ ही बिहार पहली बार परमाणु ऊर्जा उत्पादन करने वाले राज्यों की सूची में शामिल हो जाएगा.
अक्टूबर 2026 तक पूरी होगी फिजिबिलिटी स्टडी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एनटीपीसी की परमाणु इकाई NTPC Parmanu Urja Nigam Limited बांका में इस परियोजना के लिए विस्तृत फिजिबिलिटी स्टडी करेगी. यह अध्ययन अक्टूबर 2026 तक पूरा होने की संभावना है.शुरुआती चरण में यहां 700-700 मेगावाट के दो न्यूक्लियर यूनिट स्थापित करने का प्रस्ताव है. भविष्य में इसे बढ़ाकर चार यूनिट तक किया जा सकता है, जिससे कुल उत्पादन क्षमता 2.8 गीगावाट तक पहुंच जाएगी. जानकारी के अनुसार बिहार सरकार ने परियोजना के लिए आवश्यक जल उपलब्धता और प्रारंभिक सर्वे को मंजूरी दे दी है. अब आगे की स्वीकृति के लिए एनटीपीसी, भारत सरकार के Department of Atomic Energy से अनुमति मांगेगी.फिजिबिलिटी स्टडी के दौरान भूमि, जल स्रोत, पर्यावरणीय प्रभाव और सुरक्षा मानकों का गहन मूल्यांकन किया जाएगा.
बिहार की अर्थव्यवस्था को मिल सकता है बड़ा सहारा
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना बिहार की आर्थिक तस्वीर बदल सकती है. लंबे समय से बिजली की कमी और बड़े उद्योगों के अभाव से जूझ रहे राज्य को इससे बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. इस परियोजना से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे, सड़क, आवास और जल आपूर्ति जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास तेज होगा और उद्योगों के लिए स्थिर बिजली उपलब्ध हो सकेगी. इसके साथ साथ बिहार निवेशकों भी आकर्षित करेगा. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बिहार ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनता है, तो इसका असर पूरे पूर्वी भारत की औद्योगिक संरचना पर दिखाई देगा.
2047 तक 100 गीगावाट न्यूक्लियर क्षमता का राष्ट्रीय लक्ष्य
यह परियोजना भारत सरकार की उस दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वर्ष 2047 तक देश की न्यूक्लियर पावर क्षमता को 100 गीगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है. फिलहाल भारत की कुल परमाणु ऊर्जा क्षमता लगभग 8.8 गीगावाट है. एनटीपीसी खुद करीब 30 गीगावाट न्यूक्लियर क्षमता विकसित करने की योजना पर काम कर रही है. इस रणनीति के तहत बिहार के अलावा झारखंड, गुजरात, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में भी संभावित साइटों की पहचान की जा रही है.
राजस्थान और फ्रांस के साथ भी बढ़ रहा सहयोग
एनटीपीसी फिलहाल Nuclear Power Corporation of India Limited के साथ मिलकर राजस्थान में 4×700 मेगावाट का न्यूक्लियर प्रोजेक्ट विकसित कर रही है, जिसकी अनुमानित लागत लगभग ₹42,000 करोड़ है. इसके अलावा हाल ही में एनटीपीसी ने फ्रांस की ऊर्जा कंपनी EDF के साथ आधुनिक न्यूक्लियर तकनीक और तकनीकी सहयोग को लेकर समझौता भी किया है. बांका में प्रस्तावित यह न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे बिहार के औद्योगिक पुनर्जागरण के रूप में देखा जा रहा है. यदि यह परियोजना तय समय पर आगे बढ़ती है, तो बिहार देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो जाएगा जहां बड़े स्तर पर परमाणु ऊर्जा उत्पादन किया जाता है. इससे राज्य की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और औद्योगिक निवेश को नई गति मिल सकती है.