Bihar Land Registry New Rule : बिहार में जमीन विवाद, फर्जी रजिस्ट्री और खूनी संघर्ष जैसी घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार एक नई और बड़ी डिजिटल व्यवस्था लागू करने जा रही है. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा तैयार की जा रही इस प्रणाली के तहत अब कोई भी व्यक्ति जमीन खरीदने से पहले घर बैठे ऑनलाइन यह जांच कर सकेगा कि संबंधित प्लॉट विवादित है या नहीं. सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद जमीन की दोहरी बिक्री, फर्जी कागजात के आधार पर रजिस्ट्री और मालिकाना हक को लेकर होने वाले विवादों में भारी कमी आएगी. इसके साथ ही रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) की प्रक्रिया भी अधिक आसान और तेज हो जाएगी.
बिहार में लंबे समय से बड़ी समस्या रहे हैं जमीन विवाद
बिहार में जमीन को लेकर विवाद लंबे समय से गंभीर सामाजिक और कानूनी समस्या बने हुए हैं. कई मामलों में एक ही जमीन को कई लोगों को बेच देने, परिवारिक विवाद के बीच फर्जी दस्तावेज तैयार कर रजिस्ट्री कराने और मालिकाना हक छिपाकर सौदे करने जैसी घटनाएं सामने आती रही हैं. इन विवादों के कारण कई बार मारपीट, गोलीबारी और हत्या जैसी घटनाएं भी हो जाती हैं, जबकि हजारों मामले वर्षों तक अदालतों में लंबित रहते हैं. सरकार अब इसी समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कदम बढ़ा रही है.
जमीन खरीदने से पहले ऑनलाइन मिलेगी पूरी जानकारी
नई डिजिटल व्यवस्था के तहत जमीन खरीदने से पहले खरीदार को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा. आवेदन में जमीन से जुड़ी 13 महत्वपूर्ण जानकारियां भरनी होंगी. इनमें मुख्य रूप से:
- खाता नंबर
- खेसरा/खसरा नंबर
- रकबा
- जमाबंदीधारी का नाम
- जमीन की श्रेणी
- कोर्ट केस की स्थिति
- बैंक लोन की जानकारी
- सरकारी दावा या अधिग्रहण की स्थिति
जैसी जानकारियां शामिल होंगी. इस प्रक्रिया के बाद खरीदार को संबंधित जमीन की पूरी स्थिति ऑनलाइन उपलब्ध हो जाएगी. इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि जमीन बेचने वाला व्यक्ति वास्तविक मालिक है या नहीं और जमीन पर किसी तरह का कानूनी विवाद तो नहीं चल रहा.
10 दिनों में देनी होगी जांच रिपोर्ट
ऑनलाइन आवेदन जमा होने के बाद मामला संबंधित अंचल कार्यालय के पास जाएगा. इसके बाद अंचल पदाधिकारी (सीओ) और राजस्व कर्मचारी जमीन के रिकॉर्ड और मौके की स्थिति की जांच करेंगे. सरकार ने इस प्रक्रिया के लिए सख्त समय सीमा भी तय की है. अधिकारियों को आवेदन मिलने के 10 दिनों के भीतर जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड करनी होगी. रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से बताया जाएगा कि जमीन विवादमुक्त है या उस पर किसी प्रकार का मुकदमा, मालिकाना विवाद या अन्य कानूनी समस्या मौजूद है. सरकार का मानना है कि इस ऑनलाइन व्यवस्था से जमीन कारोबार में पारदर्शिता बढ़ेगी और बिचौलियों की भूमिका कम होगी. वर्तमान में लोग जमीन की जानकारी के लिए अंचल कार्यालयों के चक्कर लगाते हैं, जहां कई बार गलत जानकारी देकर उनसे लाखों रुपये की ठगी कर ली जाती है. नई व्यवस्था लागू होने के बाद खरीदार सीधे सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर जमीन की वास्तविक स्थिति जान सकेगा. इससे फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन बेचने वाले गिरोहों पर भी बड़ा असर पड़ने की उम्मीद है.
सामाजिक स्तर पर भी दिख सकता है बड़ा असर
बिहार में जमीन विवाद अक्सर आपराधिक घटनाओं का कारण बनते रहे हैं. गांवों में जमीन को लेकर गोलीबारी, मारपीट और खूनी संघर्ष की घटनाएं आम रही हैं. ऐसे में सरकार की यह पहल सामाजिक स्तर पर भी बड़ा बदलाव ला सकती है. राजस्व विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यदि लोग खरीद से पहले ही जमीन की वास्तविक स्थिति जान जाएंगे तो वे विवादित जमीन खरीदने से बचेंगे. इससे अदालतों में लंबित मुकदमों का बोझ कम होगा और पुलिस-प्रशासन पर भी दबाव घटेगा.
रियल एस्टेट और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को मिलने की संभावना है जो शहरों और कस्बों में घर बनाने के लिए प्लॉट खरीदना चाहते हैं. अक्सर लोगों को यह डर बना रहता है कि भविष्य में उनकी खरीदी गई जमीन पर कोई दूसरा व्यक्ति दावा न कर दे. विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में तेजी से बढ़ रहे रियल एस्टेट सेक्टर और निवेश के माहौल के लिए यह कदम अहम साबित हो सकता है. पारदर्शी व्यवस्था बनने से बाहरी निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होगा. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग फिलहाल इस सॉफ्टवेयर और पूरी प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है. विभाग की ओर से इसे जल्द ही राज्य के सभी अंचलों में लागू करने की तैयारी की जा रही है. माना जा रहा है कि यह व्यवस्था लागू होने के बाद बिहार में जमीन रजिस्ट्री और म्यूटेशन की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और आसान हो जाएगी.