Bihar semiconductor factory : बिहार अब हाईटेक उद्योगों की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाने जा रहा है। राज्य में सेमीकंडक्टर फैक्ट्री स्थापित करने की तैयारी तेज हो गई है। इसके लिए सरकार ने गंगा और कोसी नदी के किनारे स्थित 14 जिलों में सर्वे कराने का फैसला लिया है। सर्वे के बाद उपयुक्त स्थान का चयन कर केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
इन 14 जिलों में होगा सर्वे
विभाग के मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने बताया कि सेमीकंडक्टर यूनिट लगाने का निर्णय सैद्धांतिक रूप से लिया जा चुका है और अब इसे जमीन पर उतारने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि यह फैक्ट्री बिहार के औद्योगिक विकास में मील का पत्थर साबित होगी। सेमीकंडक्टर फैक्ट्री के लिए जिन जिलों में सर्वे किया जाएगा उसमें सुपौल, सहरसा, खगड़िया, कटिहार, भागलपुर, बक्सर, भोजपुर, पटना, सारण, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, मुंगेर और लखीसराय का नाम है।
गंगा और कोशी के किनारे वालों जिलों को प्राथमिकता
सरकार ने इन जिलों का चयन इसलिए किया है क्योंकि सेमीकंडक्टर उद्योग में बड़ी मात्रा में पानी की जरूरत होती है, जो गंगा और कोसी जैसी नदियों से आसानी से उपलब्ध हो सकता है। उद्योग विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, ये जिले बिहार में पर्याप्त बिजली आपूर्ति, बेहतर सड़क और राष्ट्रीय राजमार्गों की कनेक्टिविटी और जल संसाधनों की उपलब्धता जैसे कारक सेमीकंडक्टर प्लांट के लिए अनुकूल माहौल तैयार करते हैं।
सीएम और पीएम पहले कर चुके हैं ऐलान
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले ही बिहार में सेमीकंडक्टर यूनिट स्थापित करने की घोषणा कर चुके हैं। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नवंबर में सार्वजनिक मंच से बिहार में सेमीकंडक्टर फैक्ट्री लगाए जाने का ऐलान किया था। इसके बाद राज्य कैबिनेट ने संबंधित नीति को भी मंजूरी दी है।
रोजगार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
सेमीकंडक्टर फैक्ट्री लगने से बिहार में हजारों युवाओं को सीधे और अप्रत्यक्ष रोजगार, बड़े स्तर पर निवेश और टेक्नोलॉजी सेक्टर में राज्य की नई पहचान बनने की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य बिहार को केवल कृषि आधारित राज्य से आगे बढ़ाकर सेमीकंडक्टर, एआई और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग का हब बनाना है। इस फैक्ट्री में मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ड्रोन, रक्षा उपकरणों और अन्य आधुनिक तकनीकों से जुड़े चिप्स के निर्माण की संभावना है।
जल्द केंद्र को भेजा जाएगा प्रस्ताव
सर्वे रिपोर्ट आने के बाद उपयुक्त स्थान को अंतिम रूप देकर केंद्र सरकार को औपचारिक प्रस्ताव भेजा जाएगा। इसके बाद केंद्र की मंजूरी मिलने पर निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।